प्रायोजित तरीके से प्रदर्शन करना और फिर 'शांत' हो जाना कांग्रेस नेताओं की बना पहचान
मध्य प्रदेश कांग्रेस नेताओं को घर बैठे थाली में सजा कर सरकार बनाने का इंतजार है। दरअसल कांग्रेस नेताओं को चिलचिलाती धूप में प्रदर्शन पसंद नहीं है। कांग्रेस के नेता एसी रुम में बैठ कर प्रेसवार्ता करना पसंद करते हैं। जिस मीडिया के सामने कांग्रेस नेता प्रेसवार्ता करते हैं उसी मीडिया पर वो आरोप भी लगाते हैं कि आप तो हमारी खबर दिखाओगे नहीं लिहाजा एक बड़े हाल में बैठना प्रेसवार्ता करना और फिर मीडिया के नाम पर सिर फोड़ना कांग्रेस नेतृत्व की पहचान बन चुका है। कांग्रेस जिस मीडिया पर खबर नहीं छापने का आरोप लगाती है उसी मीडिया की खबरों पर प्रेसवार्ता करती है और फिर कहती हैं आप हमारी खबर नहीं छापते हैं। कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी हों अथवा नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार दोनों नेता आए दिन अपने निवास पर प्रेसवार्ता करते नजर आते हैं। प्रेसवार्ता के बाद वो खुद भूल जाते हैं कि उन्होंने किस विषय पर प्रेसवार्ता की थी। क्योंकि कांग्रेस नेता एक साथ करीब दस विषयों पर बात करते हैं। जिसमें मीडिया भी यह नहीं समझ पाती कि वास्तव में प्रेसवार्ता किस विषय पर थी। और फिर जब न्यूज पेपर अथवा न्यूज चैनलों में खबर नहीं चलती या नहीं छपती तो कहते हैं कि हमारी खबर नहीं चली। इन सब मुद्दों के अलावा एक और बात देखने को मिलती है जिसके तहत कांग्रेस नेता प्रदर्शन करने में कोई रुचि नहीं लेते। कोई भी मुद्दा आता है तो दो-तीन दिन खूब उधम मचाएंगे ऐसा माहौल क्रिएट करेंगे कि जनता को लगने लगता है कि अब कांग्रेस जाग उठी है। लेकिन जैसे ही दो से तीन दिन बीतते हैं तो कांग्रेस नेता फिर घर में बैठ जाते हैं। छिंदवाड़ा में जहरीली कफ सिरप मामला हो या फिर इंदौर का दूषित पानी मामला,जबलपुर बरगी डैम में क्रूज के डूबने का मामला या मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने सहित सीएम मोहन यादव के जमीन खरीदी का मामला। सभी जगहों पर कांग्रेस नेताओं ने दो-तीन दिन तक जम कर धमाचौकड़ी मचाई और फिर घर बैठ गए। दरअसल इसके पीछे एक बड़ी राजनीति है। वर्तमान में कांग्रेस संगठन में कांग्रेस के जो नेता हैं वो खुद की राजनीति चमकाए रखने सहित व्यक्तिगत 'लाभ' होने तक धमाचौकड़ी मचाते हैं। जैसे ही उनके निजी स्वार्थ पूरे हो जाते हैं वो कांग्रेस के नेता फिर घर बैठ जाते हैं। भोपाल में प्रदर्शन करना हो तो भी कांग्रेस के सारे नेता एक मंच पर आना पसंद नहीं करते। ऐसी स्थिति में कांग्रेस के नेता सरकार बनाने की बात करते हैं। जनता के बीच कांग्रेस के नेता खुद के प्रति विश्वास ही नहीं जगा पा रहे। तरह-तरह के प्रयासों के बाद भी कांग्रेस नेता जितने भी प्रयास कर रहे हैं वो सब नाकाफी साबित हो रहे हैं क्योंकि वर्तमान कांग्रेस में जितने भी प्रदर्शन हो रहे हैं वो सिर्फ व्यक्तिगत स्वार्थ साधने के लिए हो रहे हैं। पार्टी को राजनीतिक फायदा हो ऐसा एक भी प्रदर्शन कांग्रेस के नेता नहीं कर पाए। पार्टी के पदाधिकारी अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं और जो छोटे कार्यकर्ता और पदाधिकारी हैं उन्हीं पदाधिकारियों पर अंध विश्वास करके बैठे हैं कि यही नेता साल 2028 में सरकार बना कर पार्टी का उद्धार करेंगे जिससे उनके भी अच्छे दिन आएंगे।
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