भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी में बड़े नेताओं के समर्थकों को नहीं मिली तबज्जो,नौ उपाध्यक्ष और चार महामंत्रियों के साथ 'हेमंत' युग का आगाज
बहुप्रतीक्षित मप्र भाजपा की कार्यकारिणी का सन्नाटे के बीच ऐलान कर दिया गया। प्रदेश कार्यकारिणी उस वक्त घोषित की गई जब लोगों को लगा था कि अब बिहार चुनाव के बाद ही प्रदेश कार्यकारिणी का ऐलान होगा लेकिन सारी बातों को नकारते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने कार्यकारिणी घोषित करते हुए ये बता दिया कि अब प्रभावशाली नेताओं के समर्थक नहीं बल्कि वही नेता संगठन में काम करेंगे जिन्हे प्रदेश अध्यक्ष चाहेंगे। जिस प्रकार से सूची घोषित हुई है वो राजनीतिक विश्लेषकों के गले भी नहीं उतर रही है। हेमंत खंडेलवाल ने अध्यक्ष बनने के 112 दिन बाद 25 सदस्यीय टीम का ऐलान किया है। जिसमें 12 नए चेहरों को शामिल करते हुए मालवा से सर्वाधिक चेहरे शामिल किए गए हैं। संगठन में 25 फीसदी महिलाओं को भागीदारी दी गई है। पिछली कार्यकारिणी में पांच महामंत्री हुआ करते थे लेकिन इस बार चार महामंत्री ही बनाए गए हैं जिसमें राहुल कोठारी की मंत्री से महामंत्री में पदोन्नति हुई है। राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी को भी महामंत्री पद देकर आदिवासी वर्ग को साधने का प्रयास किया गया है,गौरव रणदिवे महामंत्री बने हैं तो वहीं महिलाओं में लता वानखेड़े को महामंत्री बनाया गया है। प्रदेश मीडिया प्रभारी के रुप में आशीष अग्रवाल को रिपीट कर पार्टी ने यह बताने का प्रयास किया है कि अच्छे काम को तबज्जो दी जाती है। क्योंकि पिछले तीन साल में मीडिया प्रभारी के तौर पर आशीष अग्रवाल ने अच्छा काम किया है। जिस प्रकार से मीडिया में उनकी बॉडिंग देखने को मिली उसी के प्रतिफल स्वरुप उनको रिपीट किया गया है। वर्तमान में उनको टक्कर देने वाला कोई दूर-दूर तक दिखाई भी नहीं पड़ रहा था। इस कार्यकारिणी में क्षेत्रवार संतुलन भी साधने का प्रयास किया गया है जिसमें मध्य भारत से पांच पदाधिकारी,बुंदेलखंड से तीन पदाधिकारी,सबसे ज्यादा मालवा से 11 पदाधिकारी,ग्वालियर-चंबल से पांच,महाकौशल से दो और विंध्य से तीन पदाधिकारियों को नेतृत्व दिया गया है। सामान्य वर्ग से 14 पदाधिकारी हैं,ओबीसी से छह पदाधिकारी,एसटी वर्ग से तीन तो एससी वर्ग से दो पदाधिकारियों को शामिल कर हर क्षेत्र और हर वर्ग को प्रदेश कार्यकारिणी में समाहित करने का प्रयास किया गया है। राहुल कोठारी की पदोन्नति लगभग तय थी लेकिन रजनीश अग्रवाल को प्रदेश मंत्री पद पर ही यथावत रखा गया है जो हैरान करने वाला फैसला दिखाई दिया है। हांलाकि अब भी कार्यकारिणी में कुछ नियुक्तियां होनी है जिसे समय परिस्थिति के हिसाब से करने की तैयारी की गई है।
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