भाजपा 'चेंबर पॉलिटिक्स' करने वाले और जी भाई साहब कहलाने वाले पदाधिकारियों से करेगी परहेज
मध्य प्रदेश भाजपा के संगठन को व्यवस्थित और मजबूत बनाने की कवायद लगातार चल रही है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल,क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल और प्रदेश प्रभारी महेन्द्र सिंह अब एक ऐसी सोच को धरातल में उतारने का प्रयास कर रहे हैं जिससे कई ऐसे नेताओं के सपने चकनाचूर हो जाएंगे जो सिर्फ पद लेकर चेंबर में बैठ कर अपनी पॉलिटिक्स को चमकाना चाहते हैं। ऐसे नेताओं से भाजपा का हाई कमान दूरी बना कर उन कार्यकर्ताओं को मोर्चा,प्रकोष्ठ और प्रदेश कार्यसमिति में मौका देना चाहता है जो पार्टी की रणनीति के अनुसार बूथों तक प्रवास करने में कोई परहेज न करते हों। शनिवार को भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के बीच दिन भर गुप्त बैठकों का दौर चलता रहा है। जिसमें क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल ने साफ निर्देश दिया है कि मोर्चा और प्रकोष्ठों की कार्यकारिणी अप्रैल महीने में घोषित हो जानी चाहिए। इन गुप्त बैठकों में ऐसे कार्यकर्ताओं का चयन किया जा रहा है जिन्हे पार्टी के लिए प्रवास करने से कोई परहेज न हो। दरअसल भाजपा में एक ऐसे नेताओं का भी वर्ग है जो पद लेकर चेंबर में बैठ कर अपनी पॉलिटिक्स चमकाए रखना चाहते हैं और भाई साहब कहलवाना चाहते हैं। ऐसे नेताओं से पार्टी का संगठन दूरी बना कर मेहनती वर्करों को आगे लाने की कवायद में जुटा है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एक अलग सोच के नेता हैं। अपने शांत स्वभाव के लिए खंडेलवाल को जाना जाता है लेकिन वो एक कुशल रणनीतिकार हैं। हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव के लिए बनाई गई चुनाव प्रबंधन समिति ने प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटें जीतने का कारनामा कर चुकी है। लिहाजा भाजपा अध्यक्ष खंडेलवाल जितने शांत चित्त नेता हैं उतनी ही वो रणनीतिक तौर पर एक कुशल नेता हैं। संगठन में किस प्रकार के नेताओं की जरुरत है उसकी जानकारी प्रदेश अध्यक्ष को है लिहाजा वो चाहते हैं कि साल 2027 से चुनावी वर्ष शुरु हो रहा है तो उसके पहले एक ऐसी टीम तैयार की जाए जिसके मन में चुनाव जीतने की भूख हो न कि वो पद लेकर चेंबर में बैठ कर चार नेताओं के साथ पॉलिटिक्स करने में ही खुद को नेता समझता हो और जी भाई साहब कहने पर खुशी महसूस करता हो। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस भी भाजपा की तर्ज पर ही अपने संगठन को मजबूत करने में लगा है लिहाजा अब भाजपा को अपने दांव में कुछ बदलाव कर आगे की रणनीति पर विचार करना पड़ेगा। और ऐसी स्थिति स्थितियों से निपटने में अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल काफी माहिर नेता माने जाते हैं।
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