कॉकरोचों' की सुरंग से सत्ता के सिंहासन पर पहुंचने का कांग्रेस देख रही सपना खुद पर नहीं विश्वास
मध्य प्रदेश कांग्रेस लाख कोशिशों के बाद भी जनता के बीच विश्वास बना पाने में नाकाम साबित हो रही है। यही कारण है कि 'कॉकरोच' जैसी पार्टी आने से कांग्रेस खेमें में कुछ नेता काफी खुश नजर आ रहे हैं। कांग्रेस के नेता इस बात से बिल्कुल भी हैरान नहीं हैं कि जिस पार्टी का अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ उस पार्टी में इतनी बड़ी संख्या में लोग कैसे जुड़ रहे हैं। जबकि 'कॉकरोच' सिर्फ एक सोशल मीडिया कैंपेन है, कोई रजिस्टर्ड पार्टी नहीं। MP की सियासत में इसका नाम इसलिए उछल रहा है क्योंकि ये सीधे भाजपा के कोर वोटर - युवा और सवर्ण वर्ग - को टारगेट कर रहा है। ठीक इसी प्रकार साल 2019 के विधानसभा चुनाव में जब सपाक्स पार्टी आई तो वो एक भी सीट नहीं जीत पाई लेकिन जहां पर एक दो हजार वोटों के मार्जिन वाली सीट थी वहां पर भाजपा को नुक्सान हुआ और भाजपा 1.9 सीटों पर सिमट गई। और कांग्रेस ने 114 सीट हासिल कर 15 साल बाद सरकार में वापसी की। अब कांग्रेस को खुद पर भरोसा नहीं है लिहाजा उन्हें इस बात की उम्मीद है कि काकरोच का मूवमेंट जितना आगे बढ़ेगा उतना ही कांग्रेस को फायदा होगा। क्योंकि मध्य प्रदेश में दो दलीय प्रथा है जिसमें भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी लड़ाई होती है। और सीधी लड़ाई में कांग्रेस भाजपा के सामने टिक नहीं पाती। इसी लिए कांग्रेस के नेता उम्मीद कर रहे हैं कि काकरोच का मूवमेंट प्रदेश में और बढ़े जिससे भाजपा का वोट कटे और उसका फायदा कांग्रेस को हो। कांग्रेस नेताओं से जब काकरोच पार्टी का जिक्र होता है तो उनके चेहरे पर आश्चर्य के बजाय खुशी दिखाई पड़ती है। कांग्रेस का कोई नेता यह नहीं सोचता कि उनमें आखिर क्या कमी है जिसके कारण लोग उनसे जुड़ने के बजाय तीसरे दल में जाना पसंद कर रहे हैं।
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