भाजपा संगठन में फैसले कौन ले रहा कार्यकर्ताओं के बीच उठ उठ रहा प्रश्न बागी और निष्काशित नेता हो रहे उपक्रित

May 1, 2026 - 08:49
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भाजपा संगठन में फैसले कौन ले रहा कार्यकर्ताओं के बीच उठ उठ रहा प्रश्न बागी और निष्काशित नेता हो रहे उपक्रित

मध्य प्रदेश भाजपा एक अबूझ पहेली बनती जा रही है। दरअसल जिस प्रकार से भाजपा में नियुक्तियां हो रही हैं वो पार्टी के आम कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर रही हैं। कोई भी कार्यकर्ता पार्टी के फैसले पर खुल कर तो बात नहीं करता लेकिन जैसे ही पार्टी के फैसलों की और नियुक्तियों की बात आती है तो टाट-दरी बिछाने वाला कार्यकर्ता खुद को ठगा सा महसूस करने लगता है और उसके दिल का दर्द धीरे-धीरे जुवां पर आने लगता है। हाल ही में निगम-मंडलों की नियुक्तियों का क्रम शुरु हुआ है। जिसमें सरकार और संगठन का आपसी समायोजन होता है। नियुक्ति का अधिकार तो सीएम के पास होता है लेकिन किस कार्यकर्ता की नियुक्ति करनी है वो नाम संगठन की ओर से दिए जाते हैं। लेकिन जो नियुक्तियां हुई हैं उससे यह समझ पाना मुश्किल हो रहा है कि इन नियुक्तियों में  संगठन का कोई योगदान है। क्योंकि कुछ निगमों में ऐसे नेताओं की नियुक्ति हुई है जो विवादित नेता रह चुके हैं। इन नियुक्तियों में एक है मछुआ कल्याण बोर्ड की जिन्हें साल 2022 में पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते छह साल के लिए पार्टी से निष्काशित किया गया था और उनकी दोबारा ज्वाइनिंग के कोई पुख्ता प्रमाण भी अब तक पार्टी देने में नाकाम रही है। दूसरा नाम है संजय नगायच जो अक्सर विवादों में रहे हैं। पार्टी विरोधी गतिवियों में संलिप्त रहने के अलावा संजय नगायच पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं और उनके खिलाफ कई केस भी दर्ज हैं फिर भी उन्हें निगम-मंडल में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। संजय नगायच पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा के धुर विरोधी नेताओं में भी रहे हैं। लेकिन प्रदेश संगठन में नेतृत्व परिवर्तन होते ही संजय नगायच को पहले सहयोग सेल का को-आर्डिनेटर नियुक्त किया गया उसके बाद निगम-मंडल में उनकी नियुक्ति कर दी गई। कुछ और भी ऐसी ही विवादित नियुक्तियां हुई हैं जो कार्यकर्ताओं के गले नहीं उतर रही हैं। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल बेहद सरल और सहज व्यक्तित्व के नेता हैं। 'संकोच' उनकी कमजोरी है। जिसका फायदा पार्टी के ऐसे नेताओं को मिल रहा है जो नहीं मिलना चाहिए था। फिलहाल पार्टी के कार्यकर्ता मंथन के दौर में हैं। अब प्रदेश कार्यसमिति की भी घोषणा होनी हैं। लिहाजा कार्यकर्ताओं में डर है कि यहां पर प्रदेश अध्यक्ष अपनी क्षमता के अनुसार काम करेंगे अथवा दूसरों के बताए और सुझाए नामों पर ही मुहर लगाएंगे।

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