नगरीय निकाय चुनाव से पहले ओबीसी की जातियों का आंतरिक सर्वे कराएगी भाजपा बूथ स्तर तक डेटा जुटाने की तैयारी
पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग की जातियों का आंतरिक सर्वेक्षण कराने की तैयारी में है।पार्टी संगठन से लेकर सरकार तक ओबीसी को मिलने वाले प्रतिनिधित्व को तय करने के लिए ये डेटा जुटाया जाएगा।
भाजपा प्रदेश नेतृत्व का मानना है कि सरकार और संगठन में ओबीसी की विभिन्न जातियों को उचित भागीदारी मिले, इसके लिए उनके संख्याबल और स्थिति को समझना जरूरी है। इसी के चलते बूथ स्तर तक सर्वे कराने का फैसला लिया गया है।
सर्वे के ये होंगे मुख्य बिंदु
भाजपा द्वारा कराए जाने वाले आंतरिक सर्वे में इन बातों पर फोकस रहेगा:
- जातिगत आंकड़े: ओबीसी की किस जाति की संख्या कितनी है और किस क्षेत्र में उनका प्रभाव है
- प्रतिनिधित्व: सरकार और संगठन में किस जाति को कितना प्रतिनिधित्व मिला है और कहां कमी है
- बूथ प्रबंधन: बूथ स्तर पर ओबीसी वोटर्स की स्थिति और प्रभावी नेताओं की पहचान
- समस्याएं: अलग-अलग ओबीसी जातियों की सामाजिक, आर्थिक समस्याओं का ब्योरा
क्यों जरूरी है ये सर्वे?
मुखबिर को मिली सूचना के अनुसार 2023 के विधानसभा चुनाव और आगामी पंचायत-निकाय चुनावों को देखते हुए ये कदम उठाया गया है।
1. टिकट वितरण: किस क्षेत्र से किस ओबीसी जाति के नेता को मौका देना है, इसका आकलन होगा
2. संगठन में पद: जिला, मंडल और बूथ अध्यक्षों के चयन में जातिगत संतुलन बनाने में मदद मिलेगी
3. सरकारी योजनाएं: ओबीसी की पिछड़ी जातियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए डेटा तैयार होगा
प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 27% है। इसके बावजूद कई छोटी ओबीसी जातियां खुद को उपेक्षित महसूस करती हैं। सर्वे के बाद पार्टी उन जातियों को भी मुख्यधारा में लाने की कोशिश करेगी।
कैसे होगा सर्वे?
भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष और बूथ कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी होगी। एक फॉर्मेट तैयार किया जाएगा जिसमें जाति, संख्या, प्रमुख चेहरे, वोट प्रतिशत जैसी जानकारी भरी जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को सौंपी जाएगी।
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