बीजेपी की प्रदेश कार्यसमिति में प्रदेश प्रवक्ता और पैनलिस्ट नहीं हैं 'अपेक्षित' डिबेट में कैसे रखेंगे पार्टी का पक्ष
किसी भी राजनीतिक दल के प्रवक्ता उसके चेहरे के रुप में माने जाते हैं क्योंकि न्यूज पेपर और न्यूज़ चैनलों में पार्टी के प्रवक्ता ही पार्टी की बात को मजबूती के साथ रखते हैं। लेकिन भगवान राम की नगरी में होने जा रही भाजपा की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति में प्रवक्ताओं को शामिल नहीं किया जा रहा है। करीब 90 प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों की जंबो टीम भाजपा ने घोषित की थी। जिसमें चुनिंदा सह मीडिया प्रभारियों को प्रदेश कार्यसमिति में शामिल होने का मौका दिया गया है वो भी व्यवस्थाएं देखने के लिए। अब सवाल इस बात का उठता है कि जब प्रदेश कार्यसमिति में भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता और पैनलिस्ट शामिल नहीं होंगे तो बैठक में क्या फैसले लिए गए हैं उन प्रवक्ताओं को कैसे पता चलेगा। चैनलों की डिबेट में पार्टी के प्रवक्ता किस प्रकार से पार्टी का पक्ष रख पाएंगे। इस बात में कोई सक नहीं कि प्रवक्ताओं और पैनलिस्टों को प्रदेश पदाधिकारी का दर्जा नहीं दिया जाता है। और प्रदेश कार्यसमिति में प्रदेश पदाधिकारी ही अपेक्षित होते हैं। लेकिन प्रवक्ता पार्टी का अभिन्न अंग माना जाता है। वहीं प्रवक्ता पार्टी की बात को जनता के सामने रखता है। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति में कई सत्र होंगे और इस दौरान कई राजनीतिक प्रस्ताव भी लाए जाएंगे। पार्टी आगे क्या करने वाली है और भविष्य में कौन-कौन से कार्यक्रम संचालित होने वाले हैं इन सब की जानकारी प्रवक्ताओं को ठीक से नहीं हो पाएगी। एक और अहम बात है कि इस बार कई प्रवक्ता ऐसे भी हैं जो कांग्रेस से आए हैं और उन्हें मीडिया टीम में शामिल किया गया है। ऐसे प्रवक्ताओं को भाजपा को बारीकी से देखने और समझने की जरुरत है। प्रदेश कार्यसमिति एक ऐसा मंच है जिसमें प्रवक्ता पार्टी के बारे में बारीकी से समझता है। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने प्रवक्ताओं को ही शामिल न करने का फैसला लेकर कहीं न कहीं अपना बड़ा नुकसान किया है।
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