मोदी के मन की बात के बीच कैलाश विजयवर्गीय के भविष्य की बात करते दिखे सीएम मोहन यादव
तस्वीरों को जुवां की जरुरत नहीं होती वो खुद सारी सच्चाई बयां कर देती हैं। एक ऐसी ही सच्चाई को बयां करती तस्वीर इंदौर से आई है जो बगैर बोले ही यह बताने के लिए पर्याप्त है कि यहां पर क्या चल रहा है। दरअसल मौका था रविवार को मोदी के मन की बात का जिसे भाजपा के सभी नेता सुनते हैं। बूथ स्तर तक मन की बात के प्रसारण की भाजपा द्वारा व्यवस्था की जाती है। इंदौर तो बड़ा शहर है और सीएम मोहन यादव के प्रभार वाला जिला भी है। इस बार सीएम मोहन यादव ने इंदौर में मोदी के मन की बात सुनी। सीएम के बगल में ही नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी बैठे। पार्टी के सभी कार्यकर्ता तो मोदी के मन की बात सुनने में व्यस्त थे लेकिन भाजपा के वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय और सीएम मोहन यादव तो आपस में अपने मन की ही बात करते नजर आए। दरअसल इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी मामला आने के बाद जिस प्रकार से कैलाश विजयवर्गीय की जुवान से घंटा शब्द निकला उसके बाद उनकी राजनीति हाशिए पर आ गई। सरकार में मंत्री पद से जरुर उन्हें नहीं हटाया गया लेकिन विजयवर्गीय जिस कद के नेता हैं उस कद को जरुर कम कर दिया गया। पिछले कुछ समय से कैलाश विजयवर्गीय कैबिनेट बैठकों से भी दूरी बना रहे हैं। हफ्ते भर पहले कैलाश विजयवर्गीय वरिष्ठ नेता प्रहलाद पटेल से मिलने मंत्रालय स्थित उनके कमरे में भी गए थे। और अब जिस प्रकार से सीएम मोहन यादव मोदी के मन की बात के बीच कैलाश विजयवर्गीय को समझाने का प्रयास कर रहे हैं या फिर ये कहें कि बातों ही बातों में सीएम विजयवर्गीय के भविष्य की बात कर रहे हैं उससे यह समझा जा सकता है कि कैलाश विजयवर्गीय की भूमिका भविष्य में क्या होने वाली है। अपने भविष्य को लेकर कैलाश विजयवर्गीय लगातार दिल्ली के भी चक्कर लगाते दिखे हैं क्योंकि उन्हें अब इस बात का अहसास हो चुका है कि अब उनका दौर निकल चुका है। लिहाजा सीएम की बात को विजयवर्गीय काफी गंभीरता से सुनते नजर आए। जबकि मोहन यादव के सीएम बनने के बाद दोनों नेताओं के संबंधों में पहले जैसी मिठास नहीं रही है। अब दोनों नेता सिर्फ एक पार्टी और सरकार के अंग होने के नाते ही एक दूसरे से बात करते हैं अन्यथा कैलाश विजयवर्गीय को कैबिनेट जाना भी पसंद नहीं है।
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