विधायकों के मंसूबों पर फिरा पानी नहीं बढ़ेगा वेतन और भत्ता क्षेत्र की विकास निधि वृद्धि का फैसला भी टला
मध्य प्रदेश में विधायकों की मांग पर मोहन सरकार ने करारा प्रहार करते हुए वेतन-भत्ते बढ़ाने के फैसले को रद्द कर दिया है। गौरतलब है कि प्रदेश की मोहन यादव सरकार गले तक कर्ज के बोझ में दबी है उसके बाद भी विधायक वेतन-भत्ता बढ़ाने की लगातार मांग कर रहे थे। प्रदेश सरकार 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में भी मना रही है। ऐसी स्थिति में सरकार पर अतिरिक्त हैं लिहाजा वेतन भत्ता बढ़ाना सरकार के लिए संभव नहीं हो पा रहा था। राज्य की आर्थिक स्थितियों को देखते हुए सरकार ने विधायकों के वेतन-भत्ते बढ़ाने के साथ ही निर्वाचन क्षेत्र निधि बढ़ाने का विचार फिलहाल टाल दिया है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 10 साल से मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, विधायक और पूर्व विधायक के वेतन-भत्ते में वृद्धि नहीं हुई है। भाजपा और कांग्रेस के विधायक खर्चे बढ़ने के आधार पर वेतन-भत्ते में वृद्धि की मांग कर रहे थे। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा की अध्यक्षता में समिति बनाई। इसमें भाजपा से अजय विश्नोई और कांग्रेस से सचिन यादव को शामिल किया गया। समिति का गठन होने के बाद संसदीय कार्य विभाग से अन्य राज्यों में मिल रहे वेतन-भत्ते की रिपोर्ट बनवाई गई। जिससे यह पता चला कि गुजरात, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में विधायकों के वेतन-भत्ते एमपी के विधायकों से अधिक हैं। इसके बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया कि विधायकों का वेतन-भत्ता एक लाख 10 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख 70 हजार, पूर्व विधायकों की पेंशन 35 से बढ़ाकर 58 हजार, मुख्यमंत्री का दो लाख से बढ़ाकर 2.60 लाख, मंत्रियों का 1.70 लाख से बढ़ाकर 2.20 लाख, राज्यमंत्री का 1.50 लाख से दो लाख, विधानसभा अध्यक्ष का 1.85 से बढ़ाकर 2.20 लाख, उपाध्यक्ष का 1.70 से बढ़ाकर दो लाख और नेता प्रतिपक्ष का 1.70 से बढ़ाकर 2.20 लाख रुपये प्रतिमाह वेतन-भत्ता किया जा सकता है। इसमें वेतन, सत्कार, निर्वाचन क्षेत्र के साथ दैनिक भत्ता शामिल है। इसके अलावा स्थानीय क्षेत्र विकास निधि को लेकर भी पांच करोड़ रुपये करने की मांग थी। इस पर भी विचार-विमर्श हुआ लेकिन सहमति नहीं बनी। संसदीय कार्य विभाग के अनुसार, सरकार वित्तीय स्थिति देखने के बाद ही इस संबंध में कोई निर्णय लेगी। वेतन और भत्ता नहीं बढ़ाए जाने की स्थिति में भाजपा के ही की विधायक सीएम से नाराज नजर आ रहे हैं जो सामने बोलने से परहेज कर रहे हैं और पीठ पीछे आरोप लगाने से भी गुरेज नहीं है।
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