संविदा स्वास्थ कर्मियों में फूट डाल कर आंदोलन खत्म करने का हो रहा प्रयास जहां नहीं मान रहे वहां नौकरी का दिखाया जा रहा डर
मध्य प्रदेश में NHM संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की हड़ताल खत्म कराने के लिए राज्य सरकार की तरफ से लगातार प्रयास जारी हैं। पिछले कई दिनों से चल रही हड़ताल पर अब तक राज्य सरकार की तरफ से कोई एक्शन नहीं लिया गया है। लेकिन स्वास्थ्य कर्मियों को नौकरी से बाहर करने का लगातार डर दिखाया जा रहा है। गौरतलब है कि प्रदेश भर में 32 हजार संविदा स्वास्थ्य कर्मी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और उन्हीं के सहारे पूरी स्वास्थ व्यवस्था संचालित हो रही है। लेकिन फिर भी सरकार ने उनका अधिकार नहीं दिया उल्टे अधिकार मांगने पर स्वास्थ्य कर्मियों के खिलाफ दमनकारी रणनीति अपनाई जा रही है और किसी भी सूरत में आंदोलन खत्म करने की कोशिश हो रही है। जबकि सभी संविदा स्वास्थ कर्मी अपने हक के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन संविदा कर्मियों के आंदोलन से स्वास्थ्य विभाग का स्वास्थ खराब हो गया है लिहाजा अब अलग-अलग जिलों में कर्मचारियों को डरा-धमका कर और नौकरी का हवाला देकर बैठाने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ जगहों पर सरकार अपने मंसूबों में सफल भी हुई है। दरअसल बेहद गरीब घरों से आने वाले जिन स्वास्थ कर्मियों को बड़ी मुश्किल से नौकरी मिली है उन्हें नौकरी से बाहर करने का लगातार डर दिखाया गया तो नौकरी जाने के डर से वो काम पर लौट गए लेकिन उसके बाद भी बड़ी संख्या में स्वास्थ कर्मी अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और आठ जून को सीएम हाउस घेरने की रणनीति को अंतिम रुप दे रहे हैं। गौरतलब है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव से पहले संविदा स्वास्थ कर्मियों को नियमित कर्मचारियों की तरह वेतन,भत्ते और अन्य सभी सुविधाएं देने का ऐलान किया था। चुनाव जीतते ही भाजपा पूर्व सीएम के बयान को भूल गई और आज संविदा स्वास्थ कर्मियों को अपने अधिकार के लिए एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
What's Your Reaction?