बीजेपी के 'सहयोग' सेल की निकली हवा मंत्रियों ने नहीं लिया इंट्रेस्ट अब बंद होने की कगार पर
मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कार्यकर्ताओं के लिए नवाचार करते हुए प्रदेश कार्यालय में सहयोग सेल का आगाज किया था। जिसके तहत सोमवार से शुक्रवार तक प्रदेश सरकार का कोई न कोई मंत्री दोपहर एक से तीन बजे तक प्रदेश कार्यालय में बैठता था और प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए कार्यकर्ताओं की समस्या को सुनता था लेकिन ये नवाचार सिर्फ शुर्खियों तक ही सीमित होकर रह गया। जनवरी 2026 से शुरु हुए सहयोग सेल में पहले तो मंत्रियों ने इंट्रेस्ट लिया लेकिन समय बीतने के साथ यह सहयोग सेल मंत्रियों के लिए बोझ बनने लगा। बीजेपी नेतृत्व की तरफ से सेल को सफल बनाने के लिए बकायदा को-आर्डिनेटर नियुक्त किया गया था। उसके अलावा टोकन सिस्टम लागू किया गया था जिससे एक-एक करके कार्यकर्ता अंदर जाएं और अपनी बात मंत्रियों के सामने रख सकें। लेकिन धीरे-धीरे सहयोग सेल से मंत्रियों का मोह भंग होने लगा। मंत्रियों का मोह भंग होता देख कार्यकर्ता भी सहयोग सेल से दूरी बनाने लगे। क्योंकि सहयोग सेल में कार्यकर्ताओं से आवेदन तो लिए जा रहे थे लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं हो रहीं थीं। सहयोग सेल की सफलता का खूब बखान भी किया जा रहा था। इस बीच सहयोग सेल का टेस्ट लेने के लिए Mukhbir ने अपना एक प्रतिनिधि सहयोग सेल भेजा। दिन गुरुवार था और मंत्री राजेन्द्र शुक्ल थे। Mukhbir के प्रतिनिधि ने मंत्री के सामने अपना आवेदन दिया जिसको तत्काल पूरा करने का आश्वासन मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने दिया। लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी मुखबिर के प्रतिनिधि का काम नहीं हुआ। इस प्रकार का बीजेपी का सहयोग सेल संचालित हो रहा है। इसके अलावा बीजेपी सहयोग सेल की तरफ से आज तक एक भी ऐसा आंकड़ा जारी नहीं हुआ जिसमें यह बताया गया हो कि जनवरी से अब तक कितने आवेदन और और उन आवेदनों में कितनों का निराकरण हो पाया हो। कुल मिला कर बीजेपी का सहयोग सेल एक फ्लाप शो साबित हुआ जिससे कार्यकर्ताओं को काफी उम्मीद थी।
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