सीएम मोहन यादव ने चुपके से बंद कर दी 'किसान कल्याण' योजना साल भर से किसानों के खाते में नहीं आई राशि भावांतर के 'भंवर' में पड़े रहे किसान
पीएम मोदी ने किसानों के हित को देखते हुए केंद्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) की शुरुआत फरवरी 2019 में की थी, जिसे 1 दिसंबर 2018 से लागू किया गया था। ठीक उसी तर्ज पर किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए तत्कालीन शिवराज सरकार ने मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के नाम से 22 सितंबर 2020 को राज्य में इस योजना की शुरुआत की थी। इस राज्य योजना के अंतर्गत, प्रदेश के किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के अतिरिक्त हर साल ₹6,000 (दो-दो हजार की दो किस्तों में) दिए जाते थे। इस तरह मध्य प्रदेश के पात्र किसानों को कुल ₹12,000 सालाना आर्थिक सहायता प्राप्त होती थी। लेकिन साल 2023 में जब डाक्टर मोहन यादव को सीएम बनाया गया तो उन्होने लेट लतीफी करते हुए तीन किस्तें डाली लेकिन उसके बाद राज्य सरकार की तरफ से किसानों के खाते में राशि आनी बंद हो गई। अब सवाल इस बात का उठता है कि सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया है अथवा आर्थिक तंगी के चलते होल्ड कर दिया गया है इस बात का खुलासा नहीं किया गया है। मजे की बात यह है कि राज्य सरकार द्वारा संचालित इस योजना के कथित रुप से बंद होने की किसानों को भनक तक नहीं लगी। साल 2026 को मोहन सरकार किसान कल्याण वर्ष के रुप में मना रही हैं। अभी तक किसान कल्याण निधि की राशि किसानों के खाते में नहीं आई है। उससे अलग किसानों को भावांतर सहित अन्य योजनाओं के माध्यम से लाभ देने की बात सरकार द्वारा कही जा रही है। लेकिन उस योजना का क्या हुआ जिसे किसानों के कल्याण के लिए पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान ने लागू किया था। किसानों के कल्याण के लिए शुरु हुई इतना बड़ी योजना गुपचुप तरीके से बंद कर दी गई और किसानों को सरकार ने भावांतर के 'भंवर' में ही फंसाए रखा।
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