कांग्रेस विधायकों का सदन के बाहर हंगामा और अंदर बोलती बंद आखिर पक्ष विपक्ष का ये रिस्ता क्या कहलाता है
मध्य प्रदेश में मुद्दों की कमी नहीं है। कमी है तो एक अच्छे विपक्ष की जो प्रदेश में है ही नहीं। विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। सत्र शुरु होने से पहले कांग्रेस नेता और विधायक प्रदेश भर में एक ऐसा माहौल क्रिएट करते हैं कि इस बार के सत्र में वो सरकार को चारों खाने चित्त कर देंगे लेकिन जैसे ही सत्र शुरु होता है तो बीन कांग्रेस विधायकों के साथ में होती है लेकिन सत्ता पक्ष के बजाय नाचते भी कांग्रेस के विधायक ही हैं। सदन शुरु होते ही कांग्रेस विधायकों की सारी हेकड़ी निकल जाती है और उनके पास सरकार को घेरने के मुद्दों का अकाल पड़ जाता है। शुरुआती दौर में उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने सरकार के खिलाफ जम कर झंडा उठाया लेकिन समय के साथ उनके विरोध में जंग लग गई और बजट सत्र में अब तक बोलती बंद है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार गांधी प्रतिमा के सामने नुक्कड़ नाटक करके ही संतुष्ट हैं। सदन के अंदर बैठते ही उन्हे सांप सूंघ जाता है मानो यहां पर विपक्ष नाम की कोई चीज ही नहीं है। जबकि प्रदेश में इंदौर का दूषित पानी मामला,छिंदवाड़ा का कफ सिरप मामला और उसके अलावा कानून व्यवस्था सहित बेरोजगारी के मुद्दे,भ्रष्टाचार के मुद्दे पूरे शबाब पर हैं। लेकिन विपक्ष के विधायक हैं जो गांधारी की तरह आंख में पट्टी बांध कर बैठ गए हैं। सदन में विपक्ष के रवैए को देख कर ऐसा लगता है कि दाल में कुछ काला है। यहां पर एक और भी बात देखने को मिली है। और वो यह है कि विधानसभा सत्र में कांग्रेस विधायकों की उपस्थिति 60 फीसदी से अधिक नहीं है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस सरकार को घेरना भी चाहे तो सरकार को घेर नहीं पाती है।
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