भाजपा के 'निष्क्रिय' हो चुके सक्रिय सदस्यों से आजीवन सहयोग निधि जुटाना संगठन के लिए बना चुनौती
मध्य प्रदेश भाजपा की लगातार जीत का श्रेय उसके कार्यकर्ताओं को जाता है लेकिन लगातार बन रही सरकार और कार्यकर्ताओं से सरकार और संगठन की बढ़ रही दूरियां अब प्रदेश नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। पार्टी की गतिविधियों को संचालित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी की तरफ से आजीवन सहयोग निधि जुटाने का समय-समय पर लक्ष्य रखा जाता है। और नव निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के कार्यकाल में पहली बार आजीवन सहयोग निधि जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। आजीवन सहयोग निधि पार्टी के सक्रिय सदस्यों द्वारा जुटाई जाती है लेकिन प्रदेश की अलग-अलग विधानसभा सीटों में भाजपा के कार्यकर्ता कहीं सरकार से नाराज हैं तो कहीं स्थानीय संगठन से यही कारण है कि पार्टी के जो सक्रिय कार्यकर्ता हैं वो निष्कृयता की ओर बढ़ चले हैं। Mukhbir की टीम ने कुछ क्षेत्रों का दौरा किया और सक्रिय कार्यकर्ताओं से आजीवन सहयोग निधि का बारे में जानने-समझने का प्रयास किया तो पार्टी की परतें खुलनी शुरु हो गईं। नाम न छापने की शर्त पर कार्यकर्ताओं का कहना है कि अभियान चला कर उन्हें सक्रिय सदस्य तो बना दिया गया है लेकिन स्थानीय नेतृत्व की तरफ से उन्हें महत्व नहीं दिया जाता है। जब प्रदेश स्तर पर कोई अभियान चलता है तभी पार्टी को सक्रिय सदस्यों की याद आती है ऐसी स्थिति में कौन कार्यकर्ता अपने घर का काम छोड़ कर पार्टी के लिए काम करने जाएगा। वैसे तो प्रदेश नेतृत्व की तरफ से आजीवन सहयोग निधि का जो लक्ष्य रखा गया है उसे सिर्फ विधायक और सांसद ही पूरा कर सकते हैं लेकिन आजीवन सहयोग निधि के माध्यम से पार्टी अपने सक्रिय कार्यकर्ताओं की टोह लेने के लिए उनके पास जरुर जाती है। जिस प्रकार से पार्टी के कार्यकर्ताओं में निराशा का माहौल है उन सभी बातों को देखते हुए प्रदेश कार्यालय में प्रमुख पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल,प्रदेश प्रभारी महेन्द्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। इस बैठक में पार्टी के आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा हुई राज्य सरकार की तरफ से प्रस्तुत बजट को लेकर गांव-गांव घर-घर तक पहुंचाने की रणनीति तैयार की गई। साथ में समर्पण निधि को लेकर गंभीर चर्चा की गई क्योंकि आजीवन सहयोग निधि के अभियान को 15 दिन से ऊपर बीत चुके हैं लेकिन कार्यकर्ताओं का अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से प्रदेश नेतृत्व के माथे पर शिकन देखने को मिलने लगी है। प्रदेश नेतृत्व प्रदेश भर में डेढ़ लाख से अधिक सक्रिय सदस्य और डेढ़ करोड़ से अधिक प्राथमिक सदस्य होने का दावा करती रही है लेकिन पार्टी के वो सारे दावे आजीवन सहयोग निधि में खोंखले साबित होते नजर आ रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि अगले साल यानि 2027 से चुनावी वर्ष शुरु होने जा रहा है और ऐसे समय में सक्रिय सदस्यों का अचानक निष्कृय हो जाना पार्टी के लिए शुभ संकेत नहीं है। हांलांकि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एक सुलझे हुए नेता हैं और वो जानते हैं कि कार्यकर्ताओं को कैसे मुख्य धारा में जोड़ना है लिहाजा अब प्रदेश नेतृत्व सक्रिय सदस्यों को लेकर गंभीर हो चुका है।
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