नगरीय निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस को छिन्न-भिन्न करने की रणनीति खंडेलवाल को नहीं समझ पाए कांग्रेस नेता
मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल दिखने में जितने सहज और सरल लगते हैं असल में वो रणनीति बनाने में उतने ही माहिर हैं। बीजेपी अध्यक्ष ने राज्यसभा में तीसरा उम्मीदवार ऐसे ही नहीं उतारा है उसके पीछे उनकी एक बड़ी रणनीति है। ये वही हेमंत खंडेलवाल हैं जिन्हें साल 2024 के लोकसभा चुनाव प्रबंधन समिति का संयोजक बनाया गया था जिसके बाद पहली बार भाजपा ने लोकसभा चुनाव में क्लीन स्वीप किया था। कांग्रेस ने साल 2025 को संगठन सृजन अभियान के रुप में मनाया जिसके तहत संगठनात्मक नियुक्तियों के साथ संगठन को मजबूत करने के तमाम प्रयास किए गए। और अब कांग्रेस साल 2027 में होने वाले नगरीय निकाय और पंचायत चुनाव की तैयारियों में जुट गई थी। लिहाजा उसके पहले कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने के लिए बीजेपी अध्यक्ष के पास राज्यसभा का अच्छा मौका था। असल में इस राज्यसभा चुनाव में भाजपा के पास खोने के लिए कुछ नहीं है जो कुछ है वो सिर्फ पाना है। भाजपा ने जिस प्रकार से तीसरे उम्मीदवार को उतारा है उससे यह स्पष्ट है कि यह लड़ाई सिर्फ राज्यसभा तक सीमित न होकर भाजपा V/S कांग्रेस के रणनीति की है। राज्यसभा चुनाव में अगर जीतू पटवारी,उमंग सिंघार और हरीश चौधरी मिल कर मीनाक्षी नटराजन को चुनाव जिताने में नाकाम साबित हुए तो कांग्रेस के पूरे नेतृत्व पर प्रश्न चिन्ह लग जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट जाएगा। पार्टी के अंदर निराशा का माहौल बन जाएगा। और जब तक कांग्रेस खुद को संभालने की कोशिश करेगी तब तक सिर पर नगरीय निकाय चुनाव आ चुका होगा। जहां भाजपा पहले से ही अपना परचम लहराने के लिए तैयार खड़ी होगी। भाजपा अध्यक्ष ने एक बार फिर ये बताया है कि उनकी रणनीतिक सोच वर्तमान नहीं भविष्य की राह तैयार करती है।
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