मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य होने पर कांग्रेस ने खेला आदिवासी कार्ड भाजपा को देना होगा जवाब निर्मला सप्रे की चर्चा तेज
सोमवार को ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जो फैसला सुनाया वो कांग्रेस के लिए किसी सुनामी से कम नहीं था। पूरे मामले में मजे की बात यह रही कि रामनिवास रावत चुनाव हारने के बाद भी विधायक घोषित कर दिए गए और अब शायद उन्हें मंत्रिमंडल विस्तार में इस जीत का लाभ भी मिल सकता है। लेकिन जिस प्रकार से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य घोषित की गई है उससे कांग्रेस को गहरा धक्का लगा है। इस मामले को अब कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट ले जाने का फैसला लिया है। दूसरी तरफ कांग्रेस ने अब इस मामले को आदिवासी मुद्दा बनाने की तैयारी कर ली है। इस बात में कोई सक नहीं कि मध्य प्रदेश में आदिवासी वर्ग का एक बड़ा वोटबैंक है और सरकार बनाने में आदिवासी वर्ग का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। मुकेश मल्होत्रा का फैसला आते ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने फैसले को आदिवासी विरोधी बताया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में कहा है कि भाजपा ने न्यायालय का ग़लत तरीके से इस्तेमाल कर भाजपा के पक्ष में फैसला करवाया है जो भाजपा की आदिवासी विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। कांग्रेस की तरफ से अब कहा जाने लगा है कि भाजपा दलित और आदिवासी विरोधी पार्टी है यह बात इस फैसले से स्पष्ट हो गई है। कांग्रेस की तरफ से इस मामले में आदिवासी बाहुल क्षेत्रों में बड़ा आंदोलन भी तैयार करने की योजना तैयार की जा रही है। हांलांकि ये फैसला आने के बाद मध्य प्रदेश भाजपा में खुशी की लहर है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने इस जीत को न्याय की जीत बताया है। वहीं कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य होने के बाद अब इस बात के भी चर्चे हैं कि कांग्रेस के सिंबल से निर्वाचित हुई बीना विधायक निर्मला सप्रे पर कब तक फैसला होगा। क्योंकि इस मामले में ग्वालियर हाई कोर्ट की खंडपीठ में सुनवाई चल रही है लिहाजा अब लोगों को निर्मला सप्रे पर होने वाले फैसले का इंतजार है।
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