कागजों में कट चुका सरकारी ट्रक और सरकारी महिंद्रा जीप सड़कों पर दौड़ते मिलने से स्क्रैप प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

Mar 10, 2026 - 09:06
Mar 10, 2026 - 11:04
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कागजों में कट चुका सरकारी ट्रक और सरकारी महिंद्रा जीप सड़कों पर दौड़ते मिलने से स्क्रैप प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल


भोपाल में सरकारी सिस्टम और स्क्रैप प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सरकारी रिकॉर्ड में स्क्रैप घोषित किया जा चुका सरकारी ट्रक और सरकारी महिंद्रा जीप को सड़कों पर चलता हुआ देखा गया, जिससे पूरे मामले में RTO और संस्था की मिली भगत और भ्रष्टाचार की आशंका जताई जा रही है।

बताया जा रहा है कि यह ट्रक डीजी होमगार्ड विभाग के नाम पर पंजीकृत है और इसका नंबर MP02AV1208 है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार 2 मार्च 2026 को यह ट्रक गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया के गेट के पास देखा गया, जहां इसे अन्य वाहनों की सहायता देता हुआ यह सरकारी ट्रक निजी उपयोग में ककड़ा RSVP के लिए अन्य वाहनों को खींचकर ले जाया जा रहा था। इस दौरान यह भी देखा गया कि वाहन सड़क पर सक्रिय रूप से उपयोग में लिया जा रहा था, जबकि सरकारी दस्तावेजों के अनुसार यह वाहन पहले ही स्क्रैप घोषित कर निस्तारित किया जा चुका है।

Mukhbir के अनुसार उक्त ट्रक को स्क्रैप प्रक्रिया के तहत भोपाल के मिनल रेजिडेंसी के पास स्थित ककड़ा RSVF स्क्रैपयार्ड में भेजा गया था। नियमों के अनुसार किसी वाहन को स्क्रैप घोषित किए जाने के बाद उसका पंजीकरण निरस्त हो जाता है और उसे सार्वजनिक सड़कों पर चलाना पूरी तरह गैरकानूनी एवं नियम के अनुसार प्रतिबंधित माना जाता है। केवल इतना ही नहीं इसके अलावा सरकारी कागजों में स्क्रैप की जा चुकी सरकारी जीप जिसका की नंबर MP02A7272 है इसी सरकारी नंबर प्लेट के साथ सड़कों पर दौड़ रही है जिस प्रकार से वह ट्रक दौड़ रहा था इसके भी वीडियो और साक्ष हमारे पास उपलब्ध है। यह वहां भी आरटीओ रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2025 में ही स्क्रैप हो चुका है लेकिन अजूबा और करिश्मा देखिए मध्य प्रदेश शासन के मिली भगत से वहां जो की 2025 में कागजों पर कट चुका है और सरकारी नंबर प्लेट के साथ वर्ष 2026 में सड़कों पर दौड़ रहा है वह भी कंट्रोल रूम के सामने जेल रोड से होता हुआ गोविंदपुरा की सड़कों तक जाने की एक प्रकार से पूरे शहर को नापा जा रहा है सरकारी वाहनों से जो कि कागजों पर कट चुके हैं और प्रतिबंध और गैरकानूनी रूप से संचालित हो रहे हैं ककड़ा RSVF के द्वारा। वर्ष 2019 मोटर व्हीकल एक्ट और स्क्रैप अधिनियम के अंतर्गत जो कि नया कानून 2021 में स्क्रैप नीति को ध्यान में रखते हुए बनाया गया था उसके अंदर का यह वाहन सड़क पर तो दूर स्क्रैप यार्ड के अंदर भी चलना वर्जित है ऐसे में इन वाहनों का संचालन में रोड और वह भी मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मुख्य मार्गो जो कि कंट्रोल रूम पुलिस विभाग के अंतर्गत आता है मुख्यमंत्री निवास की दूरी यहां से केवल 2 किलोमीटर है पर संचालित होता और सड़कों पर दौड़ता दिख रहा है क्या मध्य प्रदेश शासन सो रहा है?

इस घटना के सामने आने के बाद कई गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं—


- यदि स्क्रैप घोषित वाहन सड़क पर चल रहा है, तो जिम्मेदारी किसकी है?


- यदि इस वाहन से कोई दुर्घटना हो जाए तो पीड़ित को न्याय कौन दिलाएगा?


- यदि ऐसे वाहनों का उपयोग तस्करी या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जाए तो उसके लिए उत्तरदायी कौन होगा?


- वहां स्क्रैप नीति के अंतर्गत जब कोई वहां स्क्रैप किया जाता है तो  चेचिस नंबर को काट के वह प्लेट जो है सरकारी तंत्र या जो भी वहां का मालिक है उसको दी जाती है यानी कि वह प्लेट कानूनी रूप से सरकार के पास जमा हो जानी चाहिए ऐसे में बिना चेसिस नंबर वहां का संचालन कैसे हो रहा है या कस नंबर काट के सरकार को दिया ही नहीं गया है दोनों तरीके से इस महान का संचालन गैरकानूनी है इसका जिम्मेदार कौन? 


कानूनी जानकारों का कहना है कि स्क्रैप घोषित वाहन का सड़क पर उपयोग मोटर वाहन कानून और सरकारी निस्तारण नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। बिना विभागीय जानकारी और प्रशासनिक संरक्षण के इस प्रकार का संचालन संभव होना बेहद संदिग्ध माना जा रहा है।

इस पूरे प्रकरण में ककड़ा RSVF स्क्रैपयार्ड और उसके संचालक विशाल गोयल काकड़ा की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यदि स्क्रैप घोषित वाहन सड़क पर पाया जाता है तो इसकी पूरी जवाबदेही स्क्रैप प्रक्रिया से जुड़े संबंधित पक्षों पर बनती है।

मामले की पड़ताल करते हुए (MUKHBIR) मुखबिर द्वारा ककड़ा आरएसवीएफ के संचालक से बात की गई  तो कहा गया कि भोपाल आरटीओ से मेरी घनिष्ठ मित्रता है मैं इन वाहनों का उपयोग कर रहा हूं और आगे भविष्य में भी करूंगा करूंगा। शासकीय सारे वहां मेरे पास ही स्क्रैप होने के लिए आते है मैं उनका उपयोग निजी रूप से भी करूंगा। शासन में उच्च स्तर पर मेरी बहुत जान पहचान है। तुमसे जो बन पाए तुम कर लो इसका सीधा निष्कर्ष यही निकलता है की गैर कानूनी काम जो किया जा रहा है वह इतने धड़ले से किया जा रहा है कि सरकार का कोई खौफ ही नहीं है नियम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है सरे आम यह बिना सरकारी सांठगांठ के संभव ही नहीं है।

मामले को लेकर यह भी चर्चा है कि यदि जांच निष्पक्ष रूप से की जाती है तो इसमें परिवहन विभाग (आरटीओ), पुलिस प्रशासन और अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है, क्योंकि बिना प्रशासनिक जानकारी के किसी स्क्रैप वाहन का सड़क पर उपयोग होना लगभग असंभव माना जाता है।

इस पूरे मामले में वीडियो और फोटो जैसे साक्ष्य सामने आने की भी जानकारी मिल रही है, जो जांच के दौरान महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मध्यप्रदेश शासन, परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियां इस मामले में क्या कदम उठाती हैं। यदि निष्पक्ष जांच होती है तो यह मामला केवल एक वाहन का नहीं बल्कि सरकारी स्क्रैप प्रक्रिया में संभावित बड़े भ्रष्टाचार का भी खुलासा कर सकता है।

फिलहाल यह घटना सरकारी तंत्र की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा रही है।

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