कहानी 'दो कौड़ी' से शुरु हुई और राज्यसभा चुनाव से होते हुए 168 एकड़ जमीन तक पहुंची लेकिन पिक्चर अभी बाकी है?
मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों एक अलग ही मोड पर चल रही है। कांग्रेस पार्टी ने अलग-अलग कई तरह के हथकंडे अपनाए लेकिन उसे कामयाबी हासिल नहीं हुई। हकीकत तो यही है कि काजल की कोठरी में जाने के बाद कोई खुद को कहे कि उस पर दाग नहीं तो यह बात किसी को हजम नहीं होगी। जिस प्रकार से कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक अखबार को आधार बनाते हुए सीएम मोहन यादव पर बड़ा आरोप लगाया है उसकी शुरुआत पहले जीतू पटवारी से ही हुई थी जब उन्होंने सीएम मोहन यादव को 'अभिनंदन कुमार यादव कहा था' बयान आने आने बाद सीएम मोहन यादव ने भी ठान लिया कि नाम के बदले नाम ही मिलेगा तो सीएम मोहन यादव ने एक बड़े मंच पर जीतू पटवारी पर सीधा हमला बोलते हुए दो कौड़ी का अध्यक्ष और नेता बता दिया। बात उतने में खत्म नहीं हुई। कांग्रेस के पास राज्यसभा की एक सीट के लिए विधायक होते हुए भी कांग्रेस अपनी सीट नहीं बचा पाई और भाजपा ने तीसरी सीट जीत कर यह बता दिया कि रणनीतिक तौर पर कांग्रेस के नेता भाजपा के आगे कहीं नहीं लगते। इन सभी मामलों के बाद कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की भोपाल से लेकर दिल्ली तक जमकर किरकिरी हुई। उन्हें मौके की तलाश थी और वो मौका दिया अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने जब उसने सीएम मोहन यादव और उनके परिवार की में पड़ताल के आधार पर यह दावा किया है कि 13 दिसंबर 2023 को मोहन यादव ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद उनके परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने उन इलाकों में कम से कम 137 प्लॉट खरीदे हैं। यह प्लॉट करीब 168 एकड़ हैं। शहर में हो रहे विकास कार्यों का फायदा सबसे अधिक इन्हें पहुंचा है। इनमें से कुछ प्लॉट बेचे भी गए हैं। अखबार की पड़ताल जैसे ही कांग्रेस अध्यक्ष के हाथ लगी तो उन्होंने उसे ब्रह्मास्त्र समझा और प्रेसवार्ता बुला कर सीएम सहित उनके परिवार पर कथित जमीन खरीदी मामले का खुलासा कर दिया। हकीकत तो यह है कि बयानों से शुरु हुई यह कहानी अब एक दूसरे की जनता के प्रति निष्ठा तक आ पहुंची है। जो आगे और बढ़ने वाली है। क्योंकि सरकार में रहते हुए इधर-उधर होना तो आम बात है और कुंडली निकालने बेठ जाएं तो यहां हमाम में सब नंगे हैं।
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