कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नेताओं कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की नसीहत देते हुए गुटबाजी की खोली पोल
कांग्रेस पार्टी ने रविवार को अपना 141वां स्थापना दिवस मनाया। 28 दिसंबर 1885 को बॉम्बे में स्थापित यह संगठन देश की आजादी के बाद राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। लेकिन पिछले कुछ सालों में कांग्रेस पार्टी की जिस प्रकार से दुरगति हुई है उसकी दोषी भी कांग्रेस के नेता ही हैं। स्थापना दिवस के मौके पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने संबोधन में कहा कि कांग्रेस का मुकाबला भाजपा और आरएस एस से है। जो नफरत और घृणा फैलाने का काम करते हैं। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी ने पार्टी के कार्यकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा कि पद के मनोभाव को बदलने की जरुरत है। देश के संविधान को बचाने के लिए कांग्रेस के विचार को बचाना जरुरी है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि एक जुट हो जाओ एक साथ हो जाओ। पार्टी में भाई चारा,और सम्मान की जरुरत है। युवाओं को मौका देने की जरुरत है। आदिवासी,अल्पसंख्यक के खिलाफ प्रदेश की भाजपा सरकार अन्याय कर रही है उनके लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को एकजुट होकर लड़ने की जरुरत है। गौरतलब है कि मप्र कांग्रेस का अध्यक्ष बनने के बाद जीतू पटवारी लगातार गुटबाजी की बात करते रहे हैं। कुछ जगहों पर तो उन्होंने यह भी कहा है कि कांग्रेस में गुटबाजी कैंसर की तरह फैली हुई है। लिहाजा गुटबाजी को खत्म करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष तमाम तरह के प्रयास करते रहे हैं उसके बाद भी उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली और उसी के परिणाम स्वरुप स्थापना दिवस के मौके पर भी उन्होंने गुटबाजी की बात का जिक्र किया और सभी को एकजुट होने की बात कही। स्थापना दिवस के दौरान कुछ और बिंदु रहे जिसका जिक्र करना जरुरी है। कांग्रेस के इतने बड़े दिन में प्रदेश अध्यक्ष पटवारी के अलावा अन्य कोई बड़ा नेता दिखाई नहीं पड़ा। मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक मौके से गायब रहे तो वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कार्यक्रम में आना जरुरी नहीं समझा। इनके अलावा दिग्विजय सिंह और कमलनाथ भी स्थापना दिवस के मौके पर नहीं पहुंचे जिसके चलते ये साफ नजर आ रहा था कि कांग्रेस में गुटबाजी का स्तर क्या है।
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