बीजेपी की राष्ट्रीय टीम के लिए सीएम यादव ने अपने करीबी और प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने अपने करीबी का नाम दिल्ली भेजा

Jan 22, 2026 - 08:49
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बीजेपी की राष्ट्रीय टीम के लिए सीएम यादव ने अपने करीबी और प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने अपने करीबी का नाम दिल्ली भेजा

नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अब राष्ट्रीय कार्यकारिणी को लेकर कवायद तेज हो गई है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान कब होगा इस बात की कोई डेड लाइन जारी नहीं की गई है। लेकिन बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल होने वाले दावेदारों की कतार जरुर दिल्ली में देखने को मिलने लगी है। इस बीच मध्य प्रदेश सरकार और संगठन की तरफ से भी अपने व्यक्ति को राष्ट्रीय संगठन में शामिल कराने की जद्दोजहद देखने को मिल रही है। मप्र भाजपा की तरफ से भाजपा की सरकार और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए छोटी टीम का गठन तो किया गया है लेकिन बात जब राष्ट्रीय टीम की आई तो सरकार और संगठन की तरफ से छोटी टोली को ठेंगा दिखाते हुए सीएम मोहन यादव ने अपने करीबी का नाम राष्ट्रीय टीम के लिए आगे कर दिया। ऐसी स्थिति में प्रदेश संगठन भी कहां पीछे रहने वाला था। जैसे ही बीजेपी अध्यक्ष खंडेलवाल और प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा को मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने भी अपनी जमावट शुरु करने हुए प्रदेश संगठन की ओर से एक नाम राष्ट्रीय टीम के लिए दिल्ली भेज दिया है। इस बात में कोई सक नहीं कि बात जब संगठन की होगी तो राष्ट्रीय नेतृत्व पहले प्रदेश संगठन द्वारा सुझाए नाम पर ही विचार करेगा जिसके आधार पर हेमंत खंडेलवाल सीएम पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के बीच एक बात जरुर देखने को मिली है कि सरकार और संगठन के बीच कहीं न कहीं एक सुरंग है जो समन्वय की कमी को लगातार उजागर कर रही है। दरअसल सीएम मोहन यादव चाहते हैं कि जिस प्रकार से सरकार में उनके लिए फ्री हैंड दिया गया है ठीक उसी प्रकार संगठन में हस्तक्षेप का भी उनको अधिकार मिले और प्रदेश संगठन उनके हिसाब से ही चले। शायद मुख्यमंत्री मोहन यादव नव निर्वाचित अध्यक्ष नितिन नबीन के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पीएम मोदी द्वारा कही गई बात को भूल गए जिसके तहत पीएम मोदी ने कहा था कि अब उनके बास नितिन नबीन हैं। पीएम के बयान का मतलब सीधा था कि वो उनके भी अध्यक्ष हैं और वो एक कार्यकर्ता हैं। लिहाजा संगठन जो भी फैसले लेगा वो उन्हें मान्य होगा। लेकिन सीएम मोहन अपनी धुन पर ही सवार हैं। उन्हें तो राष्ट्रीय नेतृत्व में अपने करीबी व्यक्ति को शामिल कराना है। और इसी जिद के कारण सरकार और संगठन के बीच समन्वय की कमी देखने को मिल रही है। अब मजे की बात है कि इस पूरी कवायद में प्रदेश अध्यक्ष की चलती है अथवा सीएम मोहन यादव अपनी चलाने में कामयाब होते हैं।

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