प्रीतम लोधी 'ब्राह्मण' होते तो क्या अब तक बचे रहते उनसे पहले विजय शाह और संतोष वर्मा के खिलाफ भी मौन थी मोहन सरकार
सत्ता बचाए रखने की लालच में भाजपा की सरकार और संगठन विजय शाह और प्रीतम लोधी जैसे नेताओं को अप्रत्यक्ष रुप से शह देने का काम कर रही हैं। भाजपा जातियों के फेर में ऐसी उलझी है कि उन पर कोई भी कार्रवाई करने से परहेज कर रही है। हाल ही में जिस प्रकार से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के बेटे ने अपनी थार गाड़ी से कई लोगों को घायल किया और उल्टे एसडीएम को खुली धमकी दी उससे प्रदेश की कानून व्यवस्था का चश्मा उतर गया। सरकार कहती हैं कि हर इंसान के लिए कानून एक है। लेकिन हकीकत यह है कि अब कानून सिर्फ जाति के आधार पर काम करता है। आदिवासी,दलित और पिछड़ा वर्ग के लिए कानून अलग है और सामान्य वर्ग के लिए वही कानून सख्त हो जाता है। मोहन सरकार के मंत्री विजय शाह ने कर्नल शोफियां पर टिप्पणी की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई क्योंकि वो आदिवासी नेता थे। प्रीतम लोधी पर भाजपा का संगठन और सरकार कोई कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा रहा क्योंकि वो लोधी समाज से आते हैं और प्रदेश की करीब 40 सीटों पर लोधी समाज महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ये वही प्रीतम लोधी है जो ब्राह्मणों को गाली देता रहा है। उसके लिए पहले भाजपा ने उसे निकाला और फिर चुनाव के पहले न सिर्फ पार्टी में ज्वाइन करवाया बल्कि टिकट देकर उसे विधायक भी बनाया। कुछ महीने पहले संतोष वर्मा जैसे अधिकारी ने ब्राह्मण बेटियों पर अभद्र टिप्पणी की लेकिन सरकार ने उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। समझ में नहीं आ रहा कि भाजपा की सरकार को इन जातियों से डर लगता है अथवा सामान्य वर्ग से इतनी नफ़रत है कि ऐसे लोगों को पागल कुत्ते की तरह जानबूझ कर छोड़ा गया है कि आप खुल कर गाली दो आपके संरक्षण के लिए सरकार बैठी है। मजे की बात यह है कि प्रीतम लोधी के बचाव में अब प्रहलाद पटेल जैसे नेता भी आ चुके हैं। ऐसे नेताओं के बचाव में आने सरकार भी दबाव में है। इतिहास गवाह है कि जातियों के डर से जिन नेताओं को भाजपा नेतृत्व बचाने का काम कर रहा है वो जातियां भाजपा की कभी सगी नहीं रही। भाजपा का साथ हमेशा सामान्य वर्ग ने ही दिया लेकिन वर्तमान भाजपा का ऊपरी नेतृत्व सामान्य वर्ग विरोधी है जिसके कारण अन्य वर्ग के नेता अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे।
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