जमीन खरीदी का आरोप लालकृष्ण आडवाड़ी पर लगा होता तो क्या वो पद में बने रहते अथवा सीएम मोहन यादव की तरह अपने मंत्रियों से सफाई दिलवाते
मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव सहित उनके पूरे परिवार पर जिस प्रकार से जमीन खरीदी का आरोप लगा है उसको लेकर वो सभी मंत्रियों से सफाई दिलवा रहे हैं। सबसे पहले बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सीएम मोहन यादव का बचाव किया उसके बाद सरकार के वो मंत्री भी मीडिया में बयान और सीएम मोहन यादव की सफाई देते नजर आ रहे हैं जो कभी मीडिया के सामने भी नहीं आते थे। सीएम मोहन यादव उस पार्टी के नेता हैं जिस पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने साल 1996 में 'जैन हवाला कांड' (Jain Hawala Case) में भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे, तो उन्होंने तत्काल अपने पद (लोकसभा सदस्यता) से इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद उन्होंने यह संकल्प लिया था कि जब तक अदालत से उन्हें बाइज्जत बरी (क्लीन चिट) नहीं कर दिया जाता, तब तक वो न तो सदन में जाएंगे और न ही कोई चुनाव लड़ेंगे। बाद में, अदालत ने उन पर लगे आरोपों को निराधार मानते हुए उन्हें बरी कर दिया था। आज की भाजपा बदल चुकी है। सीएम मोहन यादव पर इतना बड़ा आरोप लगा तो वो खुद तो मीडिया के सामने नहीं आए लेकिन अपने मंत्रिमंडल के साथियों को अपने बचाव में उतार दिया है। अब सारे मंत्री सीएम मोहन यादव के बचाव में बयान देकर उन्हें निर्दोष साबित करने में लगे हैं। अब सवाल इस बात का उठता है कि अगर सीएम मोहन यादव निर्दोष हैं तो जांच क्यों नहीं करवाते। दूसरा सवाल यह भी है कि सीएम जैसे पद में रहते हुए उनके खिलाफ अगर जांच भी होती है तो क्या सबूत है कि जांच करने वाले दबाव में जांच नहीं करेंगे। आज प्रदेश की जनता यह जानना चाहती है कि अगर सीएम निर्दोष हैं और उन पर लगे सारे आरोप निराधार हैं तो उसकी जांच क्यों नहीं करवाते। प्रदेश की जनता के मन में अपने मुखिया के प्रति संशय की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग तो यह भी कहते नजर आ रहे हैं कि जब माली ही खेत खाए तो क्या उपाय किया जाए।
What's Your Reaction?