सरकार और संगठन में रहना है तो सवाल का जवाब दो और काम का हिसाब दो अन्यथा घर बैठो
मध्य प्रदेश सरकार और संगठन चुनावी मोड पर आ चुके हैं। सरकार बने ढाई साल हो चुके हैं अब तक मंत्री पद के मद में मस्त थे लेकिन उन्हे इस बात का अंदाजा नहीं था कि जितनी आसानी से कुर्सी मिली है उतनी ही आसानी से जा भी सकती है। संगठन की भी कुछ ऐसी ही कहानी है। पार्टी में शामिल कार्यकर्ताओं को लग रहा था कि वो भाजपा में हैं जो दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है लिहाजा उनके आगे तो कोई टिक ही नहीं पाएगा। लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम था कि भाजपा का संगठन मौका देता है तो उसकी परीक्षा भी लेता है। रविवार को जब परीक्षा का वक्त आया तो संगठन से लेकर सरकार तक हैरानी और परेशानी देखने को मिली। सबसे पहले संगठन के पदाधिकारियों की परीक्षा आयोजित हुई। जिसमें बीस-बीस प्रश्न पूछे गए। कुछ ने जवाब दिया कुछ ने मौन धारण कर लिया। लेकिन मामला संगठन का था और काम पार्टी का था लिहाजा फैल होने वालों को पार्टी से बाहर तो किया नहीं जा सकता क्योंकि आखिर में है तो वो पार्टी का कार्यकर्ता लिहाजा संगठन की तरफ से एक प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया जिसे कार्यकर्ता उत्तीर्ण होने का सर्टिफिकेट मान कर चल रहे हैं। संगठन ने तो अपना काम कर लिया लेकिन जब मंत्रिमंडल की बारी आई तो वहां का हाल तो बेहाल था। मंत्रियों ने ढाई साल में क्या किया उसकी जानकारी उन्हें खुद नहीं थी। उन्होंने क्या नवाचार किया उसकी तक जानकारी नहीं दे पाए। कुछ मंत्री तो सरकार की सभी योजनाएं गिनाने में भी नाकाम रहे। ऐसी स्थिति में पर्यवेक्षक भी क्या कर सकते थे। यहां पर फेल होने का प्रमाण पत्र भी जारी नहीं किया जा सकता था लिहाजा सभी के नतीजे सुरक्षित रख लिए गए। लेकिन इन तैयारियों से यह बात स्पष्ट हो चुकी है कि भाजपा अगली चुनौतियों के लिए कमर कस चुकी है। यह सवाल तो एक बानगी है। पार्टी के कार्यकर्ताओं को मैसेज देना जरुरी है कि संगठन की नजर में सब एक समान हैं। जो काम करेगा वही सरकार और संगठन में रहेगा अन्यथा वो आम कार्यकर्ता बन कर पार्टी में टाट-दरी बिछाने का काम करता रहे।
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