विंध्य में भगवान भरोसे भाजपा राजेन्द्र शुक्ल को छोड़ दूसरा नेता नहीं तैयार कर पाई पार्टी
भारतीय जनता पार्टी का गढ़ बन चुके विंध्य क्षेत्र में भाजपा पूरी तरह से भगवान भरोसे है। दरअसल साल 2018 के विधानसभा और 2023 के विधानसभा चुनाव में विंध्य की जनता ने भाजपा पर एकतरफा विश्वास जताया और 25 से अधिक विधायक अकेले विंध्य की जनता ने दिया लेकिन विंध्य में भाजपा ने राजेन्द्र शुक्ल के अलावा किसी अन्य नेता को पनपने का मौका नहीं दिया। कहने के लिए विंध्य में भाजपा के 25 विधायक हैं लेकिन उनमें ऐसा एक भी विधायक अथवा नेता नहीं है जो भविष्य में भाजपा की नैया को पार लगा सके। एकमात्र नेता राजेन्द्र शुक्ल हैं जिन्हें बार-भार भाजपा की तरफ से उपक्रित किया जाता है लेकिन राजेन्द्र शुक्ल एक ऐसे नेता हैं जिन्हें स्थानीय जनता की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। वो रीवा की जनता के अलावा सभी से मिलना पसंद करते हैं। रीवा में हवाई यात्रा का विस्तार तो करवा दिया लेकिन उनका जनता से संबंध भी पूरी तरह हवा हवाई ही रहा है। विंध्य से भाजपा के कई ऐसे नेता हैं जो तीन और चार बार विधानसभा का चुनाव जीत कर विंध्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं लेकिन उनको विधायकी के अलावा अन्य किसी काम के योग्य नहीं समझा गया है। रीवा,सीधी,सतना जैसे जिले में जनता ने भाजपा पर विश्वास जताया लेकिन भाजपा ने विंध्य के नेताओं पर विश्वास नहीं जताया। जिस प्रकार की परिस्थितियां विंध्य में चल रही हैं उसके हिसाब से साल 2028 भाजपा के लिए अग्नि परीक्षा साबित होने वाला है। क्योंकि जिस प्रकार के नेता भाजपा ने विंध्य की जनता को दिया है उनसे अब स्थानीय जनता का मोह भंग होने लगा है। विंध्य से आए विधायकों की पार्टी में हो रही उपेक्षा के बाद अब विंध्य की जनता भी भाजपा के विधायकों से दूरी बनाने की तैयारी कर रही है। विंध्य में राजेन्द्र शुक्ल के अलावा बात करें तो युवा चेहरों में दिव्यराज सिंह और रीति पाठक जैसे युवा चेहरे हैं जिन पर भाजपा दांव लगा सकती है लेकिन भाजपा आंख में गांधारी की तरह पट्टी बांध कर बैठी है। समय रहते भाजपा अगर विंध्य के नेताओं पर ध्यान नहीं देती है तो भाजपा के लिए बड़ी चुनौती खड़ी होने वाली है।
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