जिन राज्यों में भाजपा की सरकार वहां के कार्यकर्ता धूप सेंकते रहे जहां विपक्ष में है भाजपा वहां के कार्यकर्ताओं ने की मेहनत कांग्रेस ने उठाया जमकर फायदा

Jan 6, 2026 - 09:10
 0  127
जिन राज्यों में भाजपा की सरकार वहां के कार्यकर्ता धूप सेंकते रहे जहां विपक्ष में है भाजपा वहां के कार्यकर्ताओं ने की मेहनत कांग्रेस ने उठाया जमकर फायदा

लंबे समय तक सत्ता में बने रहने के फायदे के साथ पार्टी को उसका नुकसान भी उठाना पड़ता है क्योंकि सत्ता में रहने के कारण कार्यकर्ता 'अजगर' की तरह हो जाते हैं जो दिखने में तो विशालकाय होता है लेकिन उसमें कुछ करने की क्षमता नहीं होती है। एसआइआर के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की भूमिका एक 'अजगर' की तरह ही रही।दरअसल जिस प्रकार से एसआइआर को लेकर भाजपा ने रणनीति बनाई और उसका बचाव करती नजर आ रही थी अब वही एसआइआर भाजपा के लिए ही मंहगा साबित हो रहा है क्योंकि प्रदेश भर में 42 लाख से अधिक वोटरों के नाम कटने से अब भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरें देखने को मिल रही हैं। एसआइआर ठीक तरीके से हो उसके लिए भाजपा ने पदाधिकारियों की टीम बनाई थी। जिसमें विधायकों और सांसदों को भी काम करना था लेकिन विधायकों ने इसलिए रुचि नहीं दिखाई क्योंकि सांसदों का SIR से कोई सरोकार नहीं था। भाजपा का कोई भी सासंद एसआइआर के लिए मैदान में दिखाई नहीं पड़ा और उनकी निष्कृयता को देखते हुए विधायकों ने अभियान में रुचि नहीं ली। मजे की बात यह है कि भाजपा की यह हालत सिर्फ एमपी में नहीं बल्कि उन सभी राज्यों में है जहां पर भाजपा की सरकार है। जहां भाजपा विपक्ष में है वहां पर कार्यकर्ताओं ने खूब मेहनत की और उसके नतीजे भी दिखाई पड़ रहे हैं। कुल मिला कर लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण भाजपा के कार्यकर्ता 'अजगर' की तरह हो गए जो सिर्फ धूप सेंकने का काम करते हैं। अब उनमें 'कोबरे' की तरह विष नहीं बचा। लगातार सरकार में रहने के कारण विधायक,सांसद और कार्यकर्ताओं के बीच की दूरियां भी बढ़ती जा रही हैं। भाजपा अक्सर कार्यकर्ताओं को व्यस्त रखने के लिए अभियान चलाती रही है लेकिन काफी समय से कोई अभियान भी नहीं चल रहा है लिहाजा भाजपा के प्रदेश नेतृत्व को लगा था कि एसआइआर के काम में कार्यकर्ता लगे हैं जिसके चलते दूसरा अभियान चलाने की जरुरत नहीं है लेकिन विधायक और सांसदों की एसआइआर के प्रति उदासीनता को देखते हुए कार्यकर्ता घर बैठ गए और नतीजा यह निकला कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूरे अभियान में बाजी मारी ली और सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा पिछड़ गई। भोपाल में भाजपा के पूर्व मीडिया प्रभारी हितेष वाजपेयी का और आयुष विभाग के सेक्रेटरी संजय मिश्रा का नाम एसआइआर के दौरान काट दिया गया और बदले में इन्हें फार्म 6 दिया गया जबकि उसके तहत पहली बार नाम जुड़वाने वाले को फार्म 6 दिया जाता है। अगर ग़लती से नाम कटा है तो फार्म 8 दिया जाना चाहिए जिसके तहत स्थान परिवर्तन या फिर अन्य किसी परिस्थिति के कारण नाम कटा है तो सुधार कर फिर से जोड़ा जा सके लेकिन कार्यकर्ताओं,विधायकों और सांसदों की उदासीनता का ही यह नतीजा है कि हितेष वाजपेयी और संजय मिश्रा जैसे लोगों का नाम काट दिया गया और उन्हें फार्म 6 दिया गया। भोपाल के उत्तर,मध्य और दक्षिण-पश्चिम विधानसभा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अच्छी मेहनत की और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने दिलचस्पी नहीं दिखाई जिसका नतीजा यह निकला कि अब भाजपा अपना ही सिर पीट रही है और कांग्रेस के कार्यकर्ता उनके मजे ले रहे हैं।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow