जीतू पटवारी और उमंग सिंघार को सुबह से मालूम था नामांकन रद्द होगा तेलंगाना के कांग्रेस अध्यक्ष दिग्विजय सिंह के निवास ही क्यों गए पढ़िए पूरी खबर मुखबिर पर
भोपाल में मंगलवार को पहले विधानसभा और फिर निर्वाचन आयोग के बाहर जो हाई बोल्टेज राजनीतिक ड्रामा देखने को मिला वो पूरी तरह से स्क्रिप्टेड था। जीतू पटवारी और उमंग सिंघार को सुबह से मालूम था कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होगा। उन्हें यह भी मालूम था कि वोटिंग हुई तब भी हार तय है। क्योंकि कांग्रेस के करीब 19 विधायकों की भाजपा में बात हो चुकी थी। लिहाजा जीतू पटवारी और उमंग सिंघार ने खुद को बचाए रखने के लिए अपनी स्क्रिप्ट के अनुसार दिन भर नाटक किया। दरअसल तेलंगाना के कांग्रेस अध्यक्ष सुबह ही भोपाल आ चुके थे। वहीं मीनाक्षी नटराजन के आपराधिक प्रकरण की जानकारी भी लेकर आए थे। गुप्त रुप से मीनाक्षी नटराजन के प्रकरणों की जानकारी विधानसभा सचिवालय भेज दी गई और फिर भाजपा के पदाधिकारियों को पूरी जानकारी दे दी गई। फिर क्या था भाजपा ने अपना खेल खेला। लेकिन उसके पीछे ये किसी ने नहीं सोचा कि तेलंगाना के कांग्रेस अध्यक्ष दिग्विजय सिंह के निवास ही क्यों गए। वो प्रदेश कार्यालय भी आ सकते थे। इन सभी मामलों की जानकारी जीतू पटवारी को हो चुकी थी। लिहाजा जीतू पटवारी भी कांग्रेस विधायकों को एयरपोर्ट तक लेकर गए खुद रनवे तक पहुंचे एकजुटता के नारे लगाए गए और उसकी रील खूब वायरल की गई। जीतू पटवारी रनवे से वापस लौट आए। जब विमान आया तो फिर उसके देरी से उड़ने का बहाना बनाया गया क्योंकि कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को तो सबकुछ पहले से ही मालूम था। विधानसभा में जैसे ही नामांकन रद्द होने की औपचारिक घोषणा हुई तो जीतू पटवारी ने फोन कर प्रदेश प्रभारी से कहा कि सभी विधायकों को वापस लेकर आ जाइए धरना देने चलना है। कुल मिला कर जो भी हाई वोल्टेज ड्रामा हुआ वो पूरी तरह से स्क्रिप्टेड था। सभी लोग स्क्रिप्ट के हिसाब से अपना अभिनय कर रहे थे। जिसका अंत निर्वाचन आयोग के दरवाजे पर जमीन में लेट कर और रील वायरल करके हुआ। इस पूरे प्रकरण में यह बात क्लियर हुई कि कांग्रेस कितनी भी एकजुटता की बात करे लेकिन वहां पर एकजुटता सिर्फ खुद के पदों को बचाए रखने के लिए होती है। अगर खुद को नहीं मिला तो दूसरे को भी नहीं मिलने देंगे।
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