विंध्य से भाजपा के दो युवा चेहरे राजेन्द्र शुक्ल की बादशाहत को दे रहे चुनौती
मध्य प्रदेश की राजनीति में विंध्य का एक अलग ही महत्व रहा है। विंध्य में पहले अर्जुन सिंह और श्रीनिवास तिवारी की बादशाहत चलती थी। दोनों नेताओं के दिवंगत होने के बाद विंध्य में पावरहाउस बदला और राजेन्द्र शुक्ल ने उस जगह पर कब्जा कर लिया। लेकिन राजनीति स्थाई नहीं होती। राजेन्द्र शुक्ल की अब उमर भी ढल रही है और उसके साथ उनकी राजनीति की धार भी कमजोर पड़ रही है। सीनियर नेता होने के नाते फिलहाल वो अपना किला बचाने में कामयाब हैं। लेकिन रीवा से ही आने वाले दो युवा चेहरे अब विंध्य की राजनीति में बादशाहत कायम करने के लिए लगातार दरवाजा खटखटा रहे हैं। उन दो युवा चेहरों में दिव्यराज सिंह हैं जो तीन बार के विधायक हैं। दूसरे चेहरे के रुप में श्रीनिवास तिवारी के पोते सिद्धार्थ तिवारी हैं जिनकी सीएम मोहन यादव से बढ़ती करीबता कई राजनीतिक समीकरणों को जन्म दे रहे हैं। भाजपा में पीढ़ी परिवर्तन का दौर चल रहा है। और जिस प्रकार से रीवा सहित पूरे विंध्य में ब्राह्मण और क्षत्रियों का वर्चस्व रहा है उसको आगे भी कायम रखना है तो इस वर्ग के नेताओं को बढ़ाना होगा। युवा चेहरा होने के नाते भाजपा और सीएम मोहन यादव दिव्यराज सिंह और सिद्धार्थ तिवारी पर भविष्य भी देख रहे हैं। मंगलवार को जिस प्रकार से सीएम और विधायक दिव्यराज सिंह की तस्वीर सामने आई है उससे यह स्पष्ट नजर आता है कि सीएम भी युवा चेहरों से खुश हैं और उनमें संभावनाएं भी तलाश रहे हैं।
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