मोहन करेंगे 'भजन' योगी बने रहेंगे 'नाथ' बदलेंगे सियासी समीकरण दो राज्यों के सीएम पर 'राहू काल' भारी
मध्य प्रदेश में सीएम पर लगा कथित जमीन खरीदी का आरोप और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चंदा चोरी विवाद के बीच इन दिनों खबर है कि तीन राज्यों के सीएम बदलने हैं इसी लिए यह सारा सियासी षड़यंत्र रचा जा रहा है जिससे इन राज्यों के सीएम हटाने के बाद कोई सवाल न उठे यानि 'सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे' दरअसल साल 2027 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होना है। और योगी आदित्यनाथ जिस प्रकार से भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की आंख में किरकिरी बन कर उभरे हैं वो किसी से छुपा नहीं है। एमपी से मोहन यादव और यूपी से योगी आदित्यनाथ को भाजपा सीधे हटाती है तो उसका खामियाजा भाजपा को चुनाव में उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा बिहार में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर मामले से जिस प्रकार से ब्राह्मणों में आक्रोश देखने को मिल रहा है उसकी चपेट में न सिर्फ योगी आदित्यनाथ आए सकते हैं बल्कि मोहन यादव भी ब्राह्मणों के कोप का भाजन बन सकते हैं। ऐसी स्थिति में विपक्ष राजनीतिक रोटियां सेंकने में लग गया है। राम मंदिर में जैसे ही चंदा चोरी का विवाद उठा तो अरविंद केजरीवाल तुरंत रामलला के दर्शन करने पहुंच गए और बयान दिया कि योगी आदित्यनाथ को हटाने के लिए चंदा चोरी जैसे षड़यंत्र रचा गया है। केजरीवाल द्वारा योगी आदित्यनाथ के बचाव में बयान देना कोई आपसी व्योहार या फिर मित्रता वाला बयान तो है नहीं मतलब साफ है कि यह सोच समझ कर दिया गया बयान है। वहीं उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने मोहन यादव का समर्थन करते हुए कहा कि उनको जान बूझ कर जमीन खरीदी मामले में फंसाया जा रहा है जिससे मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाया जा सके। तीसरे सीएम के तौर पर बात उठ रही है कि राजस्थान के सीएम भजनलाल की कार्यप्रणाली से केन्द्रीय नेतृत्व खुश नहीं हैं लिहाजा उन्हें बदल कर भाजपा दूसरा सीएम बनाने की योजना बना रही है। अब खबर यह है कि उत्तर प्रदेश के सीएम तो योगी आदित्यनाथ बने रहेंगे लेकिन एमपी और राजस्थान के सीएम बदले जा सकते हैं। जिसके तहत खबर है कि राजस्थान में केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र सिंह यादव को सीएम बनाया जा सकता है तो वहीं एमपी में मोहन यादव को हटा कर किसी ब्राह्मण नेता को सीएम बनाया जा सकता है। जिससे स्थितियों में बदलाव आए और बिगड़ते सियासी समीकरण को अपने पक्ष में लाया जा सके। देश भर में जिस प्रकार से अचानक भाजपा के खिलाफ माहौल बना है उससे निपटने के लिए भाजपा का नेतृत्व कोई भी जोखिम उठाने के लिए तैयार है। मोहन यादव को हटाने से पहले एमपी में कुछ और बड़े सियासी बदलाव भी देखने को मिल सकते हैं। कुछ नेताओं की छुट्टी भी हो सकती है। तो एमपी से राष्ट्रीय टीम में कुछ नेताओं की इंट्री होना तय माना जा रहा है।
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