MP में शिक्षकों की 90% से कम ई-अटेंडेंस पर सीधे सस्पेंशन की कार्रवाई का आदेश जारी DEO से मांगी लिस्ट प्राचार्यों पर भी गिरेगी गाज
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए अलर्ट। स्कूल शिक्षा विभाग ने 90% से कम ई-अटेंडेंस वाले शिक्षकों को सीधे सस्पेंड करने का फैसला लिया है। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार कर भेजने के निर्देश दिए हैं। कार्रवाई के दायरे में लापरवाह प्राचार्य और जिम्मेदार अफसर भी आएंगे।
क्या है पूरा मामला?
प्रदेश में उच्च माध्यमिक, माध्यमिक और प्राथमिक स्तर के करीब 4.25 लाख शिक्षक पदस्थ हैं। विभाग ने 1 जुलाई 2026 से सभी शिक्षकों और शैक्षणिक अमले के लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी थी। इसका मकसद स्कूलों में शिक्षकों की फिजिकल उपस्थिति सुनिश्चित करना है।
ऐसे बढ़ी सख्ती: तबादले से सस्पेंशन तक
1. पहला चरण: 90% से कम ई-अटेंडेंस वाले शिक्षकों को स्वैच्छिक तबादले के लिए आवेदन करने से रोका गया।
2. दूसरा चरण: अनुपस्थित दिनों का वेतन काटा गया।
3. तीसरा चरण: अब सीधे सस्पेंशन की कार्रवाई होगी। DEO की रिपोर्ट के आधार पर जिला स्तर से ही आदेश जारी होंगे।
क्यों जरूरी हुई ई-अटेंडेंस?
विभाग के मुताबिक कई स्कूलों से शिकायतें मिली थीं कि शिक्षक स्कूल नहीं आते और रजिस्टर में साइन कर देते हैं। ई-अटेंडेंस से रियल टाइम हाजिरी GPS लोकेशन के साथ दर्ज होती है। इससे फर्जीवाड़ा रुकेगा।
शिक्षक संगठनों का विरोध
प्रदेश के कई शिक्षक संगठन ई-अटेंडेंस का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क की समस्या है। तकनीकी गड़बड़ी के कारण कई बार उपस्थिति दर्ज नहीं होती। कई शिक्षकों को स्मार्टफोन चलाना नहीं आता।
अफसरों पर भी एक्शन
विभाग ने साफ किया है कि जिन स्कूलों में लगातार ई-अटेंडेंस 90% से कम मिलेगी, वहां के प्राचार्यों से जवाब-तलब किया जाएगा। लापरवाही साबित होने पर DEO और BEO स्तर के अफसरों पर भी कार्रवाई होगी।
अगला कदम क्या?
DEO को 7 दिन में रिपोर्ट सौंपनी है। इसके बाद पहले चरण में उन शिक्षकों को सस्पेंड किया जाएगा जिनकी अटेंडेंस 75% से भी कम है। 75% से 90% के बीच वालों को नोटिस देकर सुधरने का मौका मिलेगा।
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