पटवारी के 'सृजन' से पूरा 'संगठन' हुआ छिन्न-भिन्न टूट की कगार पर कांग्रेस सभी नेता अलाप रहे अपना-अपना राग

Jul 3, 2026 - 08:07
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पटवारी के 'सृजन' से पूरा 'संगठन' हुआ छिन्न-भिन्न टूट की कगार पर कांग्रेस सभी नेता अलाप रहे अपना-अपना राग

साल 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद पीढ़ी परिवर्तन करते हुए केन्द्रीय नेतृत्व ने जीतू पटवारी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया तो उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। दो युवा चेहरा सामने आने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि शायद कांग्रेस अपने पुराने ढर्रे से बाहर आकर अगले चुनाव में भाजपा के लिए चुनौती पेस करेगी। लेकिन किसी को यह नहीं मालूम था कि जीतू पटवारी एक फुस्सी बम साबित होंगे। जबकि पटवारी ने साल 2025 को संगठन सृजन वर्ष के रुप में मनाया और संगठन सृजन अभियान चला कर जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के साथ पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से खड़ा करने का प्रयास किया। इस बीच जीतू पटवारी यह भूल गए कि नेतृत्व भले उनके हाथ में आ गया हो लेकिन पार्टी की चाभी अब भी दिग्विजय सिंह,अजय सिंह और कमलनाथ जैसे नेताओं के पास है। लिहाजा वो जैसी चाभी भरेंगे पार्टी वैसी ही चलेगी। पिछले कुछ दिनों से जिस प्रकार से कांग्रेस के प्रत्येक नेता पार्टी लाइन से अलग अपने-अपने ढर्रे पर चल रहे हैं जिसकी जो मर्जी वही बोल रहे हैं उससे कांग्रेस के अंदर की कलह पूरी तरह से सड़क पर आ चुकी है। अब मोटा पर्दा भी कांग्रेस की कलह को जनता के सामने आने से नहीं रोक सकता। दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी का आपसी विवाद अब सभी कार्यकर्ताओं के सामने है। अजय सिंह (राहुल) पार्टी से अलग खुद यात्राएं निकाल रहे हैं। अरुण यादव मालवा में सिमट कर रह गए हैं। कांग्रेस के जितने भी बड़े चेहरे थे आज वो खुद की कांग्रेस चला रहे हैं जिनका संगठन से कोई लेना देना नहीं है। इसका मतलब साफ है कि पटवारी ने जिस संगठन का सृजन किया था वहीं संगठन पूरी तरह से छिन्न-भिन्न हो चुका है। इसका अर्थ ये है कि साल 2028 में भाजपा के सामने कोई चुनौती नहीं है। कांग्रेस के करीब 22 से अधिक विधायक अभी से भाजपा की राह देखने लगे हैं। हकीकत तो यही है कि राज्यसभा चुनाव में वोटिंग हुई होती तो पार्टी को अपनी क्षमता का अहसास पिछले महीने ही हो गया होता।

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