भोपाल और इंदौर में हांफती मेट्रो को रफ्तार देने की तैयारी बढ़ेंगी दूरियां जुड़ेंगे और शहर
पहले इंदौर उसके बाद भोपाल से मेट्रो ट्रेन का संचालन शुरु हो चुका है। लेकिन इतने दिनों में सरकार को आभाश हो चुका है कि यह प्रोजेक्ट फैल न हो जाए। क्योंकि अभी तक मिले फीडबैक के अनुसार इंदौर-भोपाल में चल रही मेट्रो में यात्रियों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। लिहाजा अब सरकार मेट्रो का विस्तार कर अन्य शहरों को भी जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। इसी कड़ी में भोपाल से विदिशा, भोपाल से होशंगाबाद और भोपाल से रायसेन के बीच मेट्रो चलाने के मास्टर प्लान पर काम चल रहा है। इसी तरह इंदौर से देवास, इंदौर से महू और इंदौर से उज्जैन के बीच भी मेट्रो चलाई जाएगी। मेट्रो प्रोजेक्ट पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अधिकारी, विभागीय मंत्री कैलाश विजयवर्गीय प्रस्तुतीकरण देंगे। इससे पहले मेट्रो के विस्तार के प्रस्तावित शहरों के जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक की जाएगी। इंदौर-भोपाल में मेट्रो को पब्लिक ट्रांसपोर्ट से भी जोड़ा जाएगा। मेट्रो स्टेशनों पर पब्लिक ट्रांसपोर्ट जैसे बसें चलाई जाएगी। ताकि यात्री मेट्रो से उतरकर बस से अपने गंतव्य तक पहुंच सके। मेट्रो स्टेशनों के पब्लिक ट्रांसपोर्ट को ग्रामीण परिवहन तक जोड़ने की योजना है। इसके अलावा जबलपुर और ग्वालियर की मेट्रो परियोजना तैयार करने की भी रणनीति तैयार की जाएगी। शहर के बाहर छोटे नगरों तक मेट्रो चलाई जाएगी। मध्य प्रदेश के दो शहर- इंदौर और भोपाल को मेट्रोपालिटन रीजन के रूप में विकसित किया जाएगा। इसमें इंदौर और भोपाल से जुड़ने वाले शहरों तक मेट्रो रेल का विस्तार किया जाएगा। पहला मेट्रोपालिटन एरिया इंदौर, उज्जैन, देवास, धार को मिलाकर बनाया जा रहा है। दूसरा मेट्रोपालिटन एरिया भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा, ब्यावरा (राजगढ़) को मिलाकर बनाया जा रहा है। इधर, मास्टर प्लान भी बनकर तैयार है। इसे एक बार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष रखा जाएगा। उम्मीद है कि मेट्रोपालिटन एरिया को लेकर मास्टर प्लान में पुनर्विचार कर री-ड्राफ्ट बनाया जा सकता है। गौरतलब है कि राज्य सरकार साल 2047 को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना को अंतिम रुप देने में लगी है जिसके लिए बजट भी महत्वपूर्ण अंग है लिहाजा सरकार सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मैट्रो की रफ्तार तेज करेगी।
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