एमपी कांग्रेस में बड़े बदलाव के संकेत राष्ट्रीय नेतृत्व जल्द लेगा फैसला खतरे में पटवारी का 'खसरा खतौनी'
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीनों सीटों का चुनाव संपन्न हो चुका है जिसमें भाजपा के तीनों उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत दर्ज की है। लेकिन इस चुनाव में जिस प्रकार से कांग्रेस नेताओं और उनके एकजुटता की पोल खुली है उसको लेकर अब कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व गंभीर हो गया है। खासकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी को लेकर अब राष्ट्रीय नेतृत्व सोच विचार का दौर तेज हो गया है। दरअसल जिस दिन कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हुआ उस दिन कांग्रेस अध्यक्ष की तरफ से एक हाई वोल्टेज ड्रामा खेला गया जिसके तहत वो विधायकों की बाड़ेबंदी करने के लिए प्रदेश से भी बाहर लेकर जा रहे थे। मुखबिर को मिली सूचना के अनुसार जीतू पटवारी को मालूम था कि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होगा उसके बाद भी वो बाहरी तौर पर विरोध प्रदर्शन करने में जुटे रहे लेकिन आंतरिक तौर पर कांग्रेस अध्यक्ष ने कुछ ऐसा नहीं किया जिससे नामांकन रद्द होने से बचाया जा सके। मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस के कई विधायकों ने भी प्रदेश नेतृत्व पर अविश्वास जताया था। और ये सारी रिपोर्ट दिल्ली तक पहुंचाई गई थी। इसी लिए अब प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के पद पर बने रहने का खतरा मंडराने लगा है। दरअसल कांग्रेस अध्यक्ष खुद राज्यसभा की सीढ़ियां चढ़ने का सपना देख रहे थे। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि राष्ट्रीय नेतृत्व इस बार उन्हें राज्यसभा भेजेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ और मीनाक्षी नटराजन के नाम का ऐलान राहुल गांधी ने कर दिया। यही कारण है कि पार्टी में प्रदर्शन सहित कई चीजें दिखावे के लिए होती रहीं जबकि कोई ऐसी कार्रवाई नहीं हुई जिससे मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को रद्द होने से रोका जा सके। अब इन सब चीजों से अलग कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व एक ऐसे नेता की तलाश में जुट गया है जिसके नाम पर साल 2028 का विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव जीता जा सके।
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