अगस्त के अंत तक मध्य प्रदेश की राजनीति में कुछ बड़ा होने वाला है कुछ ऐसा होगा जो अप्रत्याशित होगा अकल्पनीय होगा
मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों एक अलग ही ट्रैक पर चल रही है। भाजपा के 164 विधायक होने से सरकार तो स्थिर है लेकिन जनता के मन में अ-स्थिरता का भाव बन चुका है। सीएम पर कथित जमीन खरीदी के जो आरोप लगे फिलहाल तो वो ठंडे हैं क्योंकि कांग्रेस पार्टी के अंदर चल रहे आंतरिक गतिरोध के कारण सीएम और सरकार पर लगने वाले कोई भी आरोप ज्यादा देर तक टिक नहीं पाते हैं। लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि अब सबकुछ ठीक है। असल में आने वाले तूफान से पहले की शांति भाजपा में देखने को मिल रही है। भारतीय जनता पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व बारीकी के साथ सभी घटनाओं पर नजर रख रहा है। जिस प्रकार से कांग्रेस ने सीएम मोहन यादव के खिलाफ नैरेटिव सेट किया है उसका असर जनता के बीच में भी नजर आ रहा है। आग लगा कर कांग्रेस शांत जरुर बैठ गई है लेकिन उस आग से उठने वाले धुंए का गुबार दिल्ली तक पहुंच चुका है। फिलहाल केन्द्रीय नेतृत्व संगठनात्मक प्रक्रियाओं से गुजर रहा है। लोकसभा का सदन भी नजदीक है। इन सब चीजों के बीच फिलहाल केन्द्रीय नेतृत्व शांत बैठा है। लेकिन जैसे ही राष्ट्रीय कार्यकारिणी घोषित होगी उसके बाद एमपी में बड़ा भूचाल आने वाला है। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार केन्द्रीय नेतृत्व की मानीटरिंग टीम एमपी की प्रत्येक खबर पर बारीक से नजर रख रही है। एक ऐसा बदलाव होने की संभावना बन रही है जो सबकी जुवां पर है लेकिन होंठों तक आ नहीं पा रहा है। यह बदलाव उत्तर प्रदेश के चुनाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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