निगम-मंगल छोड़ संगठन की नियुक्तियों में जुटी भाजपा एक-एक करके जारी होगी मोर्चों की कार्यकारिणी
मध्य प्रदेश भाजपा में आंतरिक तौर पर कितना विवाद चल रहा है उसकी बानगी के रुप में निगम-मंडल की सूची को जोड़ कर देखा जा सकता है। लगातार दो महीने तक अथक प्रयास करने के बाद भी सरकार और संगठन निगम-मंडलों की नियुक्तियों पर आपसी समन्वय स्थापित नहीं कर पाए और उसी के चलते सूची जारी नहीं हो पाई। इससे पहले पूर्व संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा ने भी हर जगह अपनी टांग अड़ाई और उनकी बिदाई का कारण भी यही माना जा रहा है। क्योंकि वो हर नियुक्ति में अपना हस्तक्षेप चाहते थे जिसके कारण संगठन की नियुक्तियों में भी काफी देरी हो चुकी है। मोर्चों के अध्यक्ष की घोषणा हुए डेढ़ महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है उसके बाद भी कार्यकारिणी का कोई रता-पता नहीं है। इन्ही सब चीजों को देखते हुए क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के हाथ में अस्थाई रुप से प्रभार देकर नियुक्तियों को जल्द करने का निर्देश दिया गया है। जैसे ही अजय जामवाल को प्रभार मिला तो उन्होंने 62 संगठनात्मक जिलों के प्रभारियों की घोषणा कर दी। और अब सातों मोर्चों की कार्यकारिणी पर काम तेजी से चल रहा है। दरअसल भाजपा को आगे कई अभियान शुरु करने हैं जिसमें मोर्चों की भूमिका महत्वपूर्ण होने वाली है और जब तक मोर्चों की कार्यकारिणी घोषित नहीं होगी तब तक संगठन का कोई भी अभियान धरातल में उतारना कठिन है लिहाजा अब भारतीय जनता पार्टी ने विवाद का केन्द्र बन चुके निगम-मंडल की सूची से आगे बढ़ते हुए संगठनात्मक नियुक्तियों पर फोकस करना शुरु कर दिया है। जिससे संगठन के कामों को गति मिल सके। बाद में सभी मसले सुलझाने के बाद निगम-मंडलों की सूची पर विचार मंथन किया जाएगा।
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