'ब्राह्मण' होने के कारण हितानंद शर्मा को गवानी पड़ी कुर्सी पढ़िए मुखबिर पर पूरी खबर
भारतीय जनता पार्टी में अक्सर चौंकाने वाले फैसले होते रहते हैं और अब इसके आदी न सिर्फ पार्टी के कार्यकर्ता हो चुके हैं बल्कि प्रदेश की जनता भी हो चुकी है। लेकिन जिस प्रकार से संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा की बिदाई हुई उससे कई सवाल जरुर खड़े हो गए हैं। प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद नंद शर्मा का अचानक से दायित्व परिवर्तन होने से भाजपा के अंदरखाने में तूफान ही स्थिति उत्पन्न हो गई है। अचानक लिए गये फैसले से जहां पार्टी में कहीं खुशी कहीं गम का माहौल है, वहीं इसके पीछे कौन रहा, इसे लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार हितानंद क़ो प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ही क्लीन बोल्ड किया है। हालांकि कारण बहुत सारे बताये जा रहे हैं। वैसे पार्टी के अधिकांश लोग यही मानते हैं कि हितानंद का प्रमोशन हुआ है। असल में हितानंद शर्मा पर पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वी डी शर्मा के कार्यकाल में ब्राह्मणवाद के आरोप लगे थे। 25 लोगों की कार्यकारिणी में 11 ब्राह्मण पदाधिकारी शामिल किये गये थे। वर्तमान में उन पर प्रशासनिक कार्यों में ज्यादा हस्तक्षेप करने के आरोप थे। कुछ जिलों में कलेक्टर पदस्थ करवाने में भी उनकी भूमिका बताई जा रही है।संगठन के मामलों में हितानंद का एकतरफा रोल हो गया था। वर्तमान अध्यक्ष तो शुरूआती दौर से ही उनके हिसाब से चल रहे थे। रिमोट उन्ही के हाथ में रहा। एक आरोप महिलाओं क़ो लेकर भी रहा। उन्होंने संगठन और सत्ता में कुछ विशेष महिला नेत्रियों की सिफारिश की। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के लिए भी एक महिला पदाधिकारी के लिए दिल्ली तक लाबिंग की थी।बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिल्ली जा कर हितानंद शर्मा के खिलाफ पूरी ताकत झोंक दी। तब जाकर उन्हें हटाया जा सका। दरअसल भाजपा में संगठन महामंत्री का पद महत्वपूर्ण माना जाता है जो कि सत्ता और संगठन के बीच सेतु का काम करता है, चाहे कोई भी फैसला हो संगठन महामंत्री की सिफारिश पूर्ण मानी जाती है। कृष्णमुरारी मोघे, कप्तान सिंह सोलंकी, अरविंद मेनन, सुहास भगत और हितानंद शर्मा ऐसे संगठन महामंत्री रहे हैं जिनके कार्यकाल में भाजपा शिखर पर पहुंची. पंचायत से पार्लियामेंट तक चुनाव जीत रही है। इस दौरान इस संगठन मंत्रियों की सिफारिश पर ही फैसला किया जाता है। विभिन्न निगम मंडलों में चाहे नियुक्तियों का मामला हो, चाहे कोई महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा जाना हो, संगठन महामंत्री महत्वपूर्ण कड़ी होता है। अभी जो नियुक्तियाँ होनी हैं, उनके मामले में भी हितानंद का हस्तक्षेप ज्यादा हो रहा था। यही कारण रहा कि मोहन यादव क़ो उनके खिलाफ मोर्चा खोलना पड़ा। हितानंद शर्मा को हटाने का एक और बड़ा कारण था कि वो ब्राह्मण वर्ग से आते थे और अब भाजपा में धीरे-धीरे ब्राह्मण विरोधी माहौल तैयार हो रहा है। सभी ब्राह्मण नेताओं को एक-एक करके साइड-लाइन किया जा रहा है ऐसी स्थिति में हितानंद शर्मा पार्टी के लिए रोड़ा बन रहे थे क्योंकि वो ब्राह्मण वर्ग से आते थे और उनका हस्तक्षेप पार्टी को रास नहीं आ रहा था।
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