हाई कोर्ट ने प्रमोशन पर कभी रोक लगाया ही नहीं OBC को लाभ देने के लिए मौखिक आदेश पर रोका गया प्रमोशन

Jul 1, 2026 - 18:02
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हाई कोर्ट ने प्रमोशन पर कभी रोक लगाया ही नहीं OBC को लाभ देने के लिए मौखिक आदेश पर रोका गया प्रमोशन

मध्य प्रदेश में एक दशक से अटके प्रमोशनों का रास्ता साफ हो सकता है। महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने सीनियर एडवोकेट सी.एस. वैद्यनाथन की लीगल ओपिनियन के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) को पत्र भेजकर प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने की अनुशंसा की है। इस पत्र के बाद यह भी स्पष्ट हो गया कि सरकार के एक मौखिक आदेश के कारण लाखों कर्मचारी बिना प्रमोशन के रिटायर हो गए। 

क्या है पूरा मामला:  
मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2025 की वैधता को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। सुनवाई के पहले दिन राज्य सरकार ने मौखिक आश्वासन दिया था कि कार्यवाही लंबित रहने तक प्रमोशन नहीं किए जाएंगे। यह आश्वासन जल्द फैसला होने की उम्मीद में दिया गया था। 

परिस्थितियां बदलीं, फैसला लटका:  
17 फरवरी 2026 को मामला फैसले के लिए सुरक्षित रख लिया गया था। लेकिन फैसला आने से पहले एक जज सुप्रीम कोर्ट चले गए और दूसरे का ट्रांसफर हो गया। अब नई बेंच के सामने मामले की नए सिरे से सुनवाई होगी। इससे फैसले में लंबा समय लगना तय है।

सीनियर एडवोकेट की राय के मुख्य बिंदु:

1. मौखिक आश्वासन बाध्यकारी नहीं: हाईकोर्ट ने नियमों पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है। राज्य का मौखिक आश्वासन कोर्ट के आदेश में दर्ज नहीं था, न ही इसे अंडरटेकिंग माना गया। इसलिए यह शासन की वैधानिक शक्तियों पर रोक नहीं लगा सकता।
2. प्रशासनिक ठप पड़ा: राज्य सरकार 40% क्षमता पर काम कर रही है। 10 साल से प्रमोशन रुके हैं। बड़े पद खाली हैं, जिससे कई विभागों का काम प्रभावित हो रहा है। नीचे के पदों पर भर्ती भी रुकी है।
3. सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला: State of MP v. Vinay Kumar Bohele (SLP Civil No. 5868/2023) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि नियमों को चुनौती लंबित होने पर भी DPC कर प्रमोशन दिए जा सकते हैं, बशर्ते वे अंतिम फैसले के अधीन हों।
4. सशर्त प्रमोशन की सलाह: सरकार DPC करा सकती है, लेकिन प्रमोशन हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन होंगे। अगर बाद में फैसला पलटता है तो प्रशासनिक दिक्कत हो सकती है, इसका जोखिम और जरूरत के बीच संतुलन बनाना होगा।

AG ने GAD को लिखा पत्र:  
29 जून 2026 को महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अपर सचिव, GAD को पत्र भेजा। इसमें 27 जून 2026 की सी.एस. वैद्यनाथन की राय संलग्न कर आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा गया है। पत्र की कॉपी मुख्य सचिव को भी भेजी गई है।

आगे क्या:  
अब गेंद GAD के पाले में है। अगर सरकार राय मानती है तो DPC की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। इससे हजारों कर्मचारियों को सालों से रुके प्रमोशन का लाभ मिल सकेगा। हालांकि ये प्रमोशन कोर्ट के अंतिम आदेश के अधीन रहेंगे।

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