संतोष वर्मा विजय शाह के बयान पर चुप रहने वाली सरकार ने प्रतिमा बागरी पर भी दिखाई हठधर्मिता अब जनता की अदालत का इंतजार
मंत्री प्रतिमा बागरी मामले में राज्य सरकार की तरफ से अब तक कोई तथ्यात्मक कार्रवाई नहीं हुई। प्रतिमा बागरी को संगठन की तरफ से भी तलब किया गया था जहां अजय जामवाल और हितानंद शर्मा से उनकी गुप्त चर्चा हुई। पार्टी की तरफ से तो इस मामले में कोई जवाब नहीं दिया गया लेकिन सरकार ने भी ये कह कर मामले से पल्ला झाड़ लिया कि पुलिस अपना काम कर रही है। जबकि सच्चाई तो यही है कि एक मंत्री के भाई पर कार्रवाई करने के लिए पुलिस को हजार बार सोचना पड़ेगा। और सबसे बड़ी बात यह है कि प्रतिमा बागरी के मंत्री रहते उनके भाई के खिलाफ जो भी जांच चल रही है उसमें अवरोध उत्पन्न होना सामान्य बात है क्योंकि गांजा तस्करी में मंत्री का भाई पकड़ा गया है। प्रतिमा बागरी ने तो ये कह कर लोगों को चुप करने की कोशिश की है कि उनका अब ससुराल और भाई से ज्यादा संपर्क नहीं है। जबकि हकीकत तो यही है कि प्रतिमा बागरी का जो भाई गांजा तस्करी में पकड़ा गया है वही प्रतिमा बागरी के अन्य बिजनेस भी देखता है। प्रतिमा बागरी ने कहा कि अनिल मेरा भाई है, लेकिन वह परिवार से अलग रह रहा है। उसे अलग हुए 5 साल से ज्यादा समय हो गया। वहीं उन्होंने कहा कि जिस बहन ने घर छोड़ दिया था, अब उसके पति को मैं बहनोई नहीं मानूंगी। उस व्यक्ति से मेरा किसी भी प्रकार का संबंध नहीं है। भारतीय जनता पार्टी में सुचिता की बात होती है। एक दौर था जब लाल कृष्ण आडवाणी पर आरोप लगे थे तो उन्होने खुद इस्तीफा दे दिया था। लेकिन आज भाजपा बदल चुकी है। सरकार पर अथवा किसी मंत्री पर कितना भी आरोप लग जाए कोई एक्शन नहीं लिया जाता है। सरकार में इसी प्रकार विजय शाह और नरेन्द्र शिवाजी पटेल जैसे नेताओं पर अनेकों आरोप लगते रहे फिर भी सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया जैसे कुछ हुआ ही न हो। मतलब साफ है कि अब सरकार और संगठन को जनभावनाओं की परवाह नहीं है। अगर ऐसा होता तो पहले प्रतिमा बागरी का इस्तीफा होता और फिर निष्पक्ष जांच होती लेकिन सरकार ने पूरे मामले को गंभीरता से ही नहीं लिया है। लेकिन जनता को जनार्दन कहा जाता है। जिस प्रकार से मोहन सरकार में चल रहा है प्रदेश की जनता बारीकी से सभी चीजों पर नजर रख रही है और समय आने पर जनता अपनी ताकत भी बता सकती है क्योंकि जनता के धैर्य की एक सीमा होती है लिहाजा अब मामला नशे से जुड़े कारोबार का है जहां पर सरकार मौन होकर बैठी है। ऊपर से प्रतिमा बागरी का ऐसा बयान कि कांग्रेस कौन होती है उनसे इस्तीफा मांगने वाली। बागरी के ऐसे बयान से स्पष्ट है कि सत्ता का भी नशा सिर चढ़ कर बोल रहा है जिसे समय पर नहीं उतारा गया तो भाजपा के लिए ठीक नहीं होगा।
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