कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं और मूल भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच संगठन को समन्वय बनाने में हो रही दिक्कत
साल 2023 में चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने कांग्रेस के लाखों कार्यकर्ताओं को भाजपा में शामिल तो कर लिया लेकिन अब कांग्रेस से आए कार्यकर्ताओं और भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं के बीच अंतरद्वंद दिखने लगा है। पूर्व अध्यक्ष वीडी शर्मा लगातार समन्वय बनाने की कोशिश करते रहें अब वर्तमान अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के लिए कांग्रेस से भाजपा में आए कार्यकर्ता गले की हड्डी बन चुके हैं। दरअसल भाजपा ने बड़ी संख्या में कांग्रेस नेताओं को शामिल तो कर लिया लेकिन उनकी विचारधारा को भाजपा अब तक नहीं बदल पाई। भाजपा में पार्टी सर्वोपरि होती है और कांग्रेस में नेता सर्वोपरि होते हैं। और यही विचारधारा फूल छाप कांग्रेसियों और मूल कार्यकर्ताओं के बीच में अंतर पैदा कर रही है। वर्तमान बीजेपी अध्यक्ष सहज और सुलझे हुए नेता हैं अपनी तरफ से वो लाख कोशिशें कर रहे हैं कि कांग्रेस से भाजपा में आए नेताओं को भी पार्टी में घुलने का मोका मिले लेकिन फूल छाप कांग्रेसी अपनी सोच और विचारधारा में बदलाव करने को तैयार नहीं हैं। फूल छाप कांग्रेसी सिर्फ पद लेने पर विश्वास करते हैं। जबकि भाजपा में दरी और टाट बिछाने वाले कार्यकर्ता का भी एक अलग ही मान और सम्मान होता है। यहां काम करने वाले कार्यकर्ता को महत्व दिया जाता है। लेकिन फूल छाप कांग्रेसियों को लगता है कि प्रदेश कार्यालय में खूंटा गाड़ कर बैठने से और प्रदेश अध्यक्ष के इर्द-गिर्द घूमने से उन्हें पद और प्रतिष्ठा मिल जाएगी। और यही सोचा भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं और फूल छाप कांग्रेसियों के बीच बड़ा अंतर साबित हो रही है। जो भाजपा के प्रदेश नेतृत्व की समझ से बाहर हो रही है। हांलाकि इन दोनों तरह के कार्यकर्ताओं से निपटने के लिए प्रदेश नेतृत्व लगातार प्रयास कर रहा है। समय बीतने के साथ ही कुछ नेता भाजपा में पांव जमा रहे हैं तो कुछ फूल छाप कांग्रेसी साल 2028 को देखते हुए अभी से एक सुरंग बनाने की तैयारी में लग गए हैं जो सीधे कांग्रेस कार्यालय तक पहुंचाती हो।
What's Your Reaction?