दो लाख संविदा कर्मचारियों और 3 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने का रास्ता साफ संविदा कर्मचारियों में खुशी की लहर
मध्य प्रदेश में 25- 30 वर्षों से नियमित और स्थाई किये जाने की राह देख रहे विभिन्न विभागों और निगम मण्डलों, विश्वविद्यालयों में कार्य करने वाले दो लाख संविदा कर्मचारियों और 3 लाख आउट सोर्स कर्मचारियों के लिए बुधवार को उस वक्त बड़ी खुश खबरी मिली जब जबलपुर हाईकोर्ट के द्वारा सरकार को सिंगल बैंच के उस निर्णय पर स्टे देने से मना कर दिया जिसमें 9 अप्रैल को उच्च न्यायलय के न्यायधीश ने निर्णय दिया था कि जिन संविदा कर्मचारियों को 10 वर्ष हो गये हैं उन्हें जिस प्रकार दैनिक वेतन भोगियों को विनियमित करने के लिए म.प्र. सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने 7 अक्टूबर 2016 को वर्गीकृत कर सीईकर्मी बनाया था और वेतनमान भत्ते दिये थे साथ में मंहगाई भत्ता तथा प्रतिवर्ष इंक्रीमेंट दिये जाने का प्राविधान किया था उसी प्रकार संविदा कर्मचारियों को सात अक्टूबर 2016 की नीति का लाभ दिया जाए। सिंगल बेंच के इस निर्णय के विरोध में राज्य सरकार के अधिवक्ता ने बुधवार 22 अप्रैल 2026 को डबलबेंच में स्थगन के लिए याचिका लगाई थी। उच्च न्यायलय की डबलबेंच ने स्थगन देने से इंकार करते हुये कहा कि यह एक बहुत बड़े वर्ग का सवाल है इसलिए हम इस पर स्थगन नहीं देंगें आप सिंगल वैच में अपना पक्ष रखिए और निर्णय का पालन कीजिए । म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने जबलपुर हाईकोर्ट के इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि हम न्यायलय आभारी हैं जिन्होंने 5 लाख शोषित पीड़ित संविदा कर्मचारियों और आउटसोर्स कर्मचारियों के दर्द को समझा हैं। हम पिछले 25 से 30 वर्षों से संविदा पर कार्य कर रहे थे, और शोषित हो रहे थे। हर बार संविदा कर्मचारियों को संविदा नवीनीकरण के नाम पर हर वर्ष शोषण सहना पड़ता था और बार- बार नौकरी से हटाने की धमकी भी देते थे कि तुम संविदा कर्मचारी हो हटा देंगें। वेतनमान और भत्ते नहीं मिलते थे मंहगाई भत्ता और प्रतिवर्ष इन्क्रीमेंट नहीं मिलता था, सरकारी मकान आंबटन नहीं होता था संविदा कर्मचारियों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता था। विभिन्न विभागों में कार्य करने वाले लाखों संविदा कर्मचारियों में इस निर्णय से खुशी की लहर है। म.प्र. संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि अब संविदा कर्मचारियों के साथ न्याय करते हुए उच्च न्यायलय के निर्णय का पालन करें। जिन संविदा कर्मचारियों को दस वर्ष हो गये हैं उन्हें स्थाई कर्मचारी बनाते हुए नियमित वेतनमान, मंहगाई भत्ता, इन्क्रीमेंट प्रदान किया जाए ।
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