जिस तरह 'सांप' पालने से 'विश' मिलता है अमृत नहीं ठीक उसी तरह 37 मामलों के आरोपी से भाजपा ने अच्छे आचरण की उम्मीद लगाई
साल 2023 में मध्य प्रदेश भाजपा को किसी भी प्रकार से जीत के आंकड़े तक पहुंचना था। लिहाजा जातीय समीकरण से लेकर हर वो प्रत्येक उपाय भाजपा ने अपनाया जिससे भाजपा की सरकार प्रदेश में पांचवीं बार जीत की दहलीज तक पहुंच सके इसी लिए भाजपा ने जिनको टिकट दिया उनके बैकग्राउंड की जांच किए बगैर धड़ा-धड़ दिकट बांट दिया। उन्हीं नेताओं में एक नेता थे प्रीतम लोधी जिनके खराब आचरण के चलते भाजपा ने पार्टी से निकाला था और विधानसभा चुनाव से ठीक पहले न सिर्फ प्रीतम लोधी की पार्टी में वापसी कराई बल्कि टिकट देकर विधायक भी बनाया। टिकट देने से पहले भाजपा ने प्रीतम लोधी के आपराधिक रिकार्ड की जांच कराना तक उचित नहीं समझा और टिकट दे दिया। विधायक बनते ही माननीय विधायक जी ने अपने रंग दिखाने शुरु कर दिया। ढाई साल बाद अब प्रीतम लोधी ने अपना रंग दिखाते हुए स्थानीय एसडीएम से कहा कि पहले मेरे बैंक ग्राउंड की जानकारी तो ले लेते। विधायक प्रीतम लोधी ने ठीक ही कहा था क्योंकि उनके खिलाफ अलग-अलग मामलों में कुल 37 प्रकरण दर्ज हैं। ऐसे आरोपी जन प्रतिनिधि हैं। और जब 'क्रिमिनल' प्रवित्ति के लोग जन प्रतिनिधि होंगे तो उनसे अच्छे आचरण की उम्मीद कैसे हो सकती है। कहावत है कि आप सांप पालेंगे और अमृत की उम्मीद करेंगे। ठीक उसी प्रकार से भाजपा के ऊपर यह कहावत ठीक बैठती है। जो प्रीतम लोधी कथावाचकों को गाली देता फिरता था। ब्राह्मण समाज को अपशब्द कहता फिरता था उसी प्रीतम लोधी को विधायक बना कर भाजपा ने अपनी मंशा स्पष्ट की थी कि उसके लिए सिर्फ जीत मायने रखती है न कि सामने वाले का बैंक ग्राउंड। फिलहाल भाजपा ने प्रीतम लोधी को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर उनसे जवाब मांगा है। यह बात तो स्पष्ट है कि प्रीतम लोधी का अधिकारी के प्रति आचरण ठीक नहीं था। अब वो एक मांगी नामा लिखेंगे और फिर प्रदेश संगठन इस मामले को ठंडे बस्ते में डाल देगा। क्योंकि महीने भर बाद राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होना है। लिहाजा माननीय विधायक जी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेगी। और एक चेतावनी देकर उन्हें छोड़ दिया जाएगा।
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