इंदौर में बजे 'घंटे' की दिल्ली तक सुनाई दी गूंज प्रदेश के 16 नगर निगमों के पार्षदों से सीएम करेंगे वर्चुअल मीटिंग
इंदौर में हुई दूषित पानी की मौतों के बाद प्रदेश की मोहन सरकार हरकत में आ गई है। दरअसल जिस प्रकार से इंदौर में मौतें हुई हैं उसके बाद सीएम मोहन यादव और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच काफी दूरियां देखने को मिली हैं। दरअसल विधानसभा क्षेत्र कैलाश विजयवर्गीय का है लेकिन इंदौर के प्रभारी मंत्री मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव खुद हैं लिहाजा प्रदेश की आर्थिक राजधानी में प्रशासनिक स्तर पर अगर एक पत्ता भी हिलता है तो सीएम मोहन यादव की रजामंदी शामिल होती है। और दूषित पानी की घटना के बाद जिस प्रकार से सारा मामला नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की तरफ शिफ्ट हो गया है उसके पीछे माजरा कुछ और ही दिखाई पड़ रहा है। मीडिया कर्मियों के सवाल के बदले जिस प्रकार से विजयवर्गीय ने अपशब्दों का इस्तेमाल किया उसमें उनकी हताशा और निराशा दोनों ही दिखाई पड़ रही थी इस बीच जिस प्रकार से मंत्री विजयवर्गीय ने अपने बयान में 'घंटा' शब्द का इस्तेमाल किया तो उस मामले ने प्रदेश में एक नई सियासी बहस को जन्म दे दिया। दरअसल यह पूरा मामला महापौर,निगम कमिश्नर और नगर निगम के कर्मचारियों तक ही सीमित था लेकिन लेकिन नगरीय प्रशासन मंत्री के बयान को इतना तूल दिया गया कि उसकी गूंज दिल्ली तक सुनाई पड़ी है। मीडिया में इस पूरे मामले को जोर-शोर से उठाया गया जिसके बाद दिल्ली हाई कमान से भी जमकर फटकार लगने की खबर है। घटना को लेकर आनन-फानन में सीएम मोहन यादव ने प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के महापौरों और निगम कमिश्नरों की वर्चुअल बैठक बुलाई गई है जिसमें पानी को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए जाएंगे।
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