भाजपा के महापौर ने खुद की 'सरकार और सिस्टम' पर उठाया सवाल कहा उनके पास नहीं कोई अधिकार
इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हो चुकी है तो वहीं कई लोग अस्पताल में भर्ती हैं। देश का सबसे स्वच्छ शहर और मप्र की आर्थिक राजधानी कहलाने वाले इंदौर में नेताओं की हालत इतनी दयनीय हो चुकी है कि उनका खुद की सरकार से ही भरोसा उठने लगा है। मजे की बात यह है कि जिस इंदौर में इतनी बड़ी घटना हुई है उसी इंदौर के प्रभारी मंत्री सीएम यादव खुद हैं। दो दिन पहले नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय खुद से कंट्रोल खो बैठे थे और उन्होने मीडिया कर्मियों से भी अपशब्द कह दिए थे। वो मामला अभी तक शांत नहीं हुआ था कि गुरुवार शाम को एक होटल में बैठक हुई जिसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय,तुलसीराम सिलावट,महापौर पुष्यमित्र भार्गव सहित कलेक्टर और अन्य अधिकारी मौजूद थे। बैठक के दौरान महामौर पुष्यमित्र भार्गव व्यथित होकर बोले कि 'मै किस काम का महापौर हूं' इसके लिए राजनीति में नहीं आया था। फैसलों का पालन ही नहीं होता है। कलेक्टर साहब को दो दिन पहले मैसेज किया था लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया,अधिकारी बता दें कि उन्हें कितनी बार फोन करना है कहोगे तो 100 बार फोन करुंगा। महापौर ने बैठक में असमर्थता जाहिर करते हुए कहा कि मेरा यह संदेश सीएम तक पहुंचा दें। मंत्री महापौर की असमर्थता यह दर्शा रही है कि सरकार तो सिर्फ कागजों में है। मंत्रियों के पास सिर्फ पोर्ट पोलियो है बांकी उनके हाथ में कुछ नहीं है। मंत्रियों की हालत यह है कि हाथ में डंडा पकड़ा दिया गया है लेकिन उसे वो सिर्फ देख सकते हैं छू नहीं सकते हैं। महापौर के भरे गले को देख कर एसीएस दुबे को दया आई और उन्होंने कहा कि हम इंदौर नगर निगम को कुछ और अधिकारी दे देते हैं। इस पर महापौर ने कहा अधिकारियों की कमी नहीं है जो हैं वही ठीक से काम कर लें तो स्थिति सुधर जाएगी। कुल मिला कर सरकार के अंदर की बातें अब बाहर आने लगी हैं। Mukhbir के द्वारा लगातार ऐसी खबरें प्रकाशित होती रहीं हैं जिसमें यह बताया जाता रहा है कि सरकार सिर्फ कागजों में है बांकी किसी के पास करने के लिए कोई अधिकार नहीं है। पहले छिंदवाड़ा और अब इंदौर में इतनी मौतें हो चुकी हैं और उसका बड़ा कारण यही निकल कर आया है कि अधिकार विहीन मंत्री और विधायक अराजकता पर अंकुश लगाने में नाकाम हो रहे हैं।
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