'सरकार पर गुस्सा नहीं दिखा पाए तो मीडिया कर्मियों पर दिखाई झल्लाहट' अंदर का दर्द आया बाहर
मप्र की मोहन सरकार में कुछ ऐसे नेता हैं जो सीएम मोहन यादव से काफी सीनियर हैं। जिसमें कैलाश विजयवर्गीय,प्रहलाद पटेल,राकेश सिंह और डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल जैसे नेता शामिल हैं। इन सभी नेताओं को मंत्री तो बना दिया गया है लेकिन अधिकार के नाम पर इनके पास इतना पावर नहीं है कि ये मंत्री अपने विभाग के चपरासी तक का तबादला कर सकें। समय-समय पर इन मंत्रियों के मन की टीस किसी न किसी बहाने बाहर आती रही है लेकिन उसमें पर्दा डाल दिया जाता है। ये सभी पार्टी के वरिष्ठ नेता भी हैं लिहाजा खुद ये सोच कर चुप हो जाया करते थे कि उनके किसी भी बयान का पार्टी में बड़ा असर पड़ सकता है। लेकिन धैर्य की भी एक सीमा होती है। जिस प्रकार से इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई तो उससे नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर सवाल खड़े होने लगे। क्योंकि कैलाश विजयवर्गीय इंदौर के ही नेता हैं। जिस दिन दूषित पानी का मामला सामने आया उसी दिन कैलाश विजयवर्गीय के पास कुछ मीडिया कर्मी सवाल करने पहुंच गए क्योंकि उन्हीं के विभाग का मामला भी था। जैसे ही मीडिया कर्मियों ने उनसे सवाल किया तो मंत्री विफर पड़े और बोले कि क्या फिजूल की बात करते हो। इसके बाद उन्होंने कुछ अपशब्द भी कहे। कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेता से ऐसे बयान की उम्मीद नहीं थी। लिहाजा खबर आग की तरह वायरल हो गई हांलाकि बाद में मंत्री विजयवर्गीय ने अपने बयान पर खेद व्यक्त किया लेकिन इस बयान से यह साफ हो गया कि पद मिलने के बाद भी उनके पास पावर नहीं है जिसके तहत वो किसी के खिलाफ कार्रवाई करने में असमर्थ हैं। लिहाजा ऐसी स्थिति में सिर्फ पर्दा डालने का काम किया जा सकता है। लेकिन जब तेज आंधी आती है तो पर्दा उड़ जाता है और जो अंदर होता है वो बाहर दिखाई पड़ने लगता है। ठीक ऐसा ही ऐसा ही मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के साथ भी हुआ। जब बात उनके कंट्रोल और सहनशीलता से बाहर निकल गई तो उनके धैर्य का बांध फूट गया और जो सरकार के प्रति आक्रोश लंबे समय से दबा हुआ था वो अपशब्दों के बहाने बाहर आ गया। कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल जैसे नेता लंबे समय से नाखुश हैं और उसकी जानकारी वो दिल्ली तक पहुंचाते रहे हैं लेकिन वर्तमान सरकार और संगठन में वरिष्ठ नेताओं की सुनवाई नहीं हो रही हैं जो किसी न किसी बहाने बाहर आ रही है और फिर उसे ढकने की प्रक्रिया शुरु कर दी जाती है।
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