इंदौर में हुई मौतों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान हफ्ते भर के अंदर मांगी रिपोर्ट
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों की प्रारंभिक जांच के बारे में सीएम यादव ने जानकारी दी है। जिसके तहत यह बताया गया है कि सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजर रही पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवर का पानी पेयजल में मिल गया था। अब तक इस घटना में 15 लोगों की मौत की खबर है (आधिकारिक आंकड़ा 4-10 के बीच है), जबकि 272 से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हुए हैं। दूषित पानी पीने से हुई मौतों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव से दो सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इंदौर में दूषित पेयजल प्रदाय से हुई दुखद घटना के संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने के उपरांत प्रदेश के अन्य स्थानों के लिए भी हम सुधारात्मक कदम उठा रहे हैं। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध कार्यक्रम बनाने के निर्देश दिए हैं। गौरतलब है कि इंदौर देश के सबसे स्वच्छ शहरों में है और जिस प्रकार से वहां पर गंदा पानी पीने से मौत ने अपना तांडव मचाया है उससे सरकार के पास खुद के बचाव के लिए कुछ नहीं है। इस मामले की गूंज अब दिल्ली तक पहुंच चुकी है। जिसके चलते अब राज्य सरकार पर काफी दबाव आ गया है। और यही कारण है कि अब मुख्यमंत्री खुद पूरे मामले को गंभीरता से देख रहे हैं।
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