रीवा में सीएम के जितने ज्यादा दौरे होते हैं उससे कहीं ज्यादा वहां की जनता का पलायन समस्या बन रहा
भाजपा की सरकार कहती हैं कि विंध्य में खूब विकास हो रहा है। जो सड़क और बिजली के मामले में दिखाई भी पड़ रहा है लेकिन इस विकास से रीवा और विंध्य की जनता का पेट तो नहीं भरेगा। पेट भरने के लिए युवाओं को चाहिए रोजगार जो रीवा सहित विंध्य के अन्य जिलों में नहीं मिलता है। रीवा का युवा वर्ग लगातार पलायन की ओर अग्रसर है जिसे रोकने के लिए सरकार कुछ करने में अब तक नाकाम साबित हुई है। रीवा के गांवों में औसतन 55 वर्ष से ऊपर की आबादी निवास करती है। 55 वर्ष से नीचे के लोग देश भर के अलग-अलग राज्यों में जाकर रोजगार तलाश रहे हैं और अपना परिवार पाल रहे हैं। पिछले 20 साल में भाजपा की सरकार में जो भी सीएम रहे उनके ताबड़तोड़ दौरे रीवा में हुए हैं। यहां तक कि पीएम मोदी और अमित शाह के दौरे भी रीवा में होते रहे हैं लेकिन सारे दौरे सिर्फ वोट बैंक भरने के लिए हुए-पेट भरने के लिए नहीं हो रहे हैं। डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल लगातार सरकार में मंत्री हैं लेकिन वो भी रीवा में कोई भी इंडस्ट्री लगवाने में नाकाम रहे हैं। विंध्य में एक सिंगरौली ऐसा क्षेत्र है जहां पर रोजगार के मौके हैं लेकिन वहां पर विंध्य और मध्यप्रदेश के युवाओं को रोजगार मिलने के बजाय अन्य राज्यों के युवाओं को रोजगार दिया जाता है। सीएम दौरे करते हैं बड़ी घोषणाएं भी करते हैं लेकिन कोई भी योजना धरातल में नहीं उतरती है। रीवा का युवा वर्ग औसतन 80 फीसदी विंध्य से बाहर भोपाल अथवा पीथमपुर के अलावा अन्य राज्यों में जाकर रोजगार ढूंढता है। दूसरे राज्यों में ही उनके बच्चे पढ़ाई भी करते हैं और फिर बाहर ही वो नौकरी भी करने लगते हैं। विकास की बात करने वाले सीएम ने कभी मूलभूत समस्याओं की ओर देखने का प्रयास तक नहीं किया। हवा में सीएम जाते हैं हवा हवाई फेंकते हैं और रीवा का हवा में ही विकास हो जाता है। युवाओं को भी हवा में ही रोजगार मिल जाता है। इस प्रकार से रीवा का विकास हो रहा है और उसी विकास पर राज्य सरकार अपनी पीठ थपथपा कर खुश हो जाती है।
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