भाजपा और मोहन सरकार से सवर्ण वर्ग का मोह भंग आज चुनाव हुए तो भाजपा को होगा नुकसान
सवर्णों के बल पर खड़ी मध्य प्रदेश भाजपा से अब सवर्ण ही नाराज हो गया है। दरअसल ओबीसी वर्ग को साधने के चक्कर में भाजपा ने अपने मूल वोटरों से ही किनारा कर लिया है। आए दिन मध्य प्रदेश में सवर्ण वर्ग के खिलाफ कुछ ऐसी घटनाएं हो रही हैं जिसके पीछे अप्रत्यक्ष तरीके से सरकार होती है। UGC के नए एक्ट की बात करें अथवा आइएएस संतोष वर्मा द्वारा दिए गए विवादित बयान की बात करें हर जगह सवर्ण वर्ग को नीचा दिखाने का प्रयास किया गया और राज्य सरकार मौन होकर तमाशा देखती रही। ऊपर से ओबीसी आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 फीसदी किए जाने से उपजे विवाद और कानूनी लड़ाई ने सामान्य वर्ग को नाराज कर रखा है। इसके चलते लंबे समय से सरकारी भर्ती प्रभावित हो रही है। इसी तरह पदोन्नति में आरक्षण जैसे नियमों के कारण आरक्षित और सामान्य वर्ग एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा है। Mukhbir द्वारा कराए गए एक सर्वे के आधार पर अगर आज चुनाव कराए जाएं तो भारतीय जनता पार्टी को भारी नुकसान होता दिखाई पड़ रहा है। 50 से अधिक विधानसभा सीटों में सर्वे कराया गया है जिसमें सामान्य वर्ग के करीब 2000 लोगों से बात की गई। जब सवर्णों से बात हुई तो उनका गुस्सा सरकार और संगठन दोनों के प्रति बराबर देखने को मिला। इतना ही नहीं जिन लोगों से फीडबैक लिया गया वो सभी भाजपा की सरकार में सामान्य वर्ग के जो मंत्री और विधायक हैं उनसे भी खासे नाराज हैं क्योंकि जिस प्रकार से सामान्य वर्ग के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है उस मामले में सामान्य वर्ग का कोई भी नेता बोलने की हिम्मत नहीं दिखा पा रहा है। लिहाजा सामान्य वर्ग के नेताओं को लेकर भी सवर्णों के बीच में ठीक माहौल नहीं है। भोपाल में ही किसी भी चाय अथवा पान की दुकान में खड़ा सामान्य वर्ग का व्यक्ति मोहन सरकार के विरोध में बात करता सुनाई पड़ता है। और यही हाल प्रदेश के सभी जिलों में देखने को मिल रहा है। प्रदेश में सामान्य वर्ग की सबसे बड़ी आबादी विंध्य में है और वहां का सवर्ण भी अब भाजपा के विरोध में बात करता नजर आ रहा है। मतलब साफ है कि समय रहते भाजपा की सरकार ने अपनी छवि को दुरुस्त नहीं किया तो साल 2028 भाजपा के लिए संभव नहीं असंभव हो जाएगा।
What's Your Reaction?