सहयोग निधि का टारगेट पूरा करने में नाकाम रही भाजपा ने बढ़ाई तारीख लेकिन कार्यकर्ता नहीं ले रहे रुचि
संगठनात्मक कार्यों को निर्वाध रुप से संचालित करने के लिए भाजपा की तरफ से प्रति वर्ष पं. दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर आजीवन सहयोग निधि जुटाने का अभियान प्रारंभ किया जाता है। इस वर्ष भी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में आजीवन सहयोग निधि अभियान का आयोजन किया गया। करीब 50 करोड़ का लक्ष्य भी रखा गया लेकिन पार्टी निर्धारित लक्ष्य समय पर हासिल नहीं कर पाई। अब लक्ष्य हासिल करने के लिए 15 मार्च तक डेड लाइन जारी की गई है। तारीख बढ़ाने के बाद भी पार्टी के कार्यकर्ताओं में आजीवन सहयोग निधि के प्रति कोई इंट्रेस्ट देखने को नहीं मिल रहा है। Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार अभी तक भाजपा सहयोग निधि के रुप में सिर्फ दस करोड़ रुपये जुटा पाई है। दरअसल आजीवन सहयोग निधि पार्टी भाजपा अपने सक्रिय सदस्यों से लेती है लेकिन जिलों की कार्यकारिणी फिर प्रदेश की कार्यकारिणी जारी होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में निराशा का वातावरण देखने को मिला। सबसे बड़ी वजह यह भी देखने को मिली की भाजपा के कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर उनके जो नेता हैं वो ज्यादा महत्व नहीं देते। दूसरी तरफ भाजपा में कांग्रेसवाद हावी होने के कारण भी आजीवन सहयोग निधि जुटाने में काफी समस्याएं आ रही हैं। भाजपा के जो मूल कार्यकर्ता हैं वो कभी भी अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटते लेकिन कांग्रेस से भाजपा में आए लाखों कार्यकर्ताओं के कारण अब भाजपा में समीकरण बदलने लगा है। कांग्रेस से भाजपा में आए कार्यकर्ता सिर्फ पद चाहते हैं और उन्हें सहयोग निधि से कोई लेना-देना नहीं ऐसी स्थिति में भाजपा के मूल और सक्रिय कार्यकर्ता भी फूल छाप कांग्रेसियों को देख कर घर में बैठ जाते हैं। आने वाला समय भाजपा के लिए लगातार कठिन हो रहा है। क्योंकि भाजपा में शामिल हुए कांग्रेसियों ने अब सभी जगहों पर अपना प्रभाव डालना शुरु कर दिया है और उसका असर भाजपा के मूल कार्यकर्ताओं में देखने को मिल रहा है। फिलहाल मध्य प्रदेश भाजपा इस बात को लेकर हैरान और परेशान हैं कि लक्ष्य को कैसे हासिल किया जाए।
What's Your Reaction?