संविदा कर्मियों को नियमितीकरण के नाम पर समिति का थमाया 'झुनझुना' पदोन्नति पर आरक्षण के लिए भी बनी थी समिति
भोपाल के न्यू दशहरा मैदान में आयोजित संविदा महासम्मेलन में सीएम मोहन यादव ने बड़ी घोषणा कर उन्हें खुश करने का प्रयास किया और सभी संविदा कर्मी सीएम की घोषणा से मुस्कुराते हुए अपने घर निकल गए इसी आशा और विश्वास में कि अब वो नियमित कर्मचारी कहलाएंगे। लेकिन हजारों की संख्या में भोपाल आए संविदा कर्मियों ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि सीएम ने उनको नियमित करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग और भारतीय मजदूर संघ के प्रतिनिधियों को मिला कर एक समिति गठित करने का फैसला किया है। जिसमें संविदा कर्मियों से जुड़ी सभी समस्याओं को लेकर विस्तार से चर्चा करके समाधान खोजने के लिए कहा गया है। सीएम ने ये भी आश्वासन दिया है कि अगर कहीं कोई समस्या आई तो वो हैं। कार्यक्रम के दौरान संविदा कर्मियों को जो आश्वासन दिया गया है उसमें ये भी कहा गया है कि स्वास्थ्य बीमा,ग्रेच्युटी,अनुकंपा नियुक्ति और पेंशन का लाभ भी मिल सकेगा। लेकिन यहां पर मजे की बात यह है कि ठीक इसी प्रकार से पदोन्नति पर आरक्षण को लेकर भी एक समिति का गठन किया गया था। समिति गठित होने के बाद लाखों की संख्या में कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं लेकिन समिति आज तक अंतिम निर्णय लेने में नाकाम रही है। कार्यक्रम के दौरान सीएम ने संविदा कर्मियों का दिल बहलाते हुए कहा कि हमने दस वर्ष से अधिक अनुभवी संविदा कर्मियों को नियमित पदों के विरुद्ध 50 प्रतिशत संविलियन प्रारंभ कर दिया है और इसे आगे बढ़ाने का काम करने वाले हैं। सीएम के बयान में ही दो तरह की बातें निकल कर सामने आ रही हैं जिसके तहत वो दस वर्ष के अनुभवी संविदा कर्मियों की बात कह रहे हैं दूसरी तरफ समिति के गठन की बात कर रहे हैं। मतलब साफ है कि सीएम यादव ने संविदा कर्मियों के दिल में उठ रहे ज्वार-भांटे को शांत तो करने के लिए घोषणाएं तो कर दी हैं साथ में समिति का झुनझुना भी पकड़ा दिया है जिसे संविदा कर्मी अब तक समझ नहीं पाए और घोषणा से खुश होकर घर लौट गए हैं।
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