मकर संक्रांति से निगम-मंडल की नियुक्ति का दौर होगा शुरु अगले कुछ दिन होंगे महत्वपूर्ण
मप्र भाजपा और सरकार समय के साथ सशक्त होने का दावा तो कर रहे हैं लेकिन पार्टी के अंदर पदों को लेकर चल रही खींचतान से पार्टी और सरकार अब तक उबरने में नाकाम रही है। यही कारण है कि मोहन सरकार के दो साल से अधिक का वक्त बीतने के बाद भी सरकार और संगठन मिल कर निगम-मंडलों की नियुक्ति करने में अब तक नाकाम रहे। पिछले दो महीने से भाजपा के कार्यकर्ता निगम-मंडल में शामिल होने के लिए लगातार कसरत कर रहे हैं। अपनी तरफ से सभी जगहों पर फील्डिंग जमा रहे हैं लेकिन उनकी मेहनत का नतीजा नहीं निकल रहा। पार्टी ने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष का भी ऐलान कर दिया लेकिन एमपी बीजेपी के नेताओं का इंतजार खत्म नहीं हुआ। स्थिति तो यहां तक पहुंच चुकी है कि अब भाजपा नेताओं ने निगम-मंडल पर बात करना भी बंद कर दिया है। लेकिन Mukhbir को मिली सूचना के अनुसार भाजपा अब खर मांस के खत्म होने का इंतजार कर रही है क्योंकि भाजपा की पहली सूची फायनल है और दूसरी सूची भी करीब-करीब फायनल होने की स्थिति में है। जानकारी के अनुसार पहली सूची में करीब 15 नाम शामिल किए गए हैं। जिसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रभाव देखने को मिलेगा। दूसरी सूची में पार्टी विशुद्ध रुप से भाजपा में काम करने वाले कार्यकर्ताओं को स्थान देने जा रही है। तीसरी और अंतिम सूची में भाजपा संगठन ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को शामिल करेगी जो किसी न किसी कारण वश राजनीति का शिकार हुए और पद मिलने की स्थिति में भी उनके हाथ खाली हैं। लिहाजा मप्र भाजपा की सरकार और संगठन एक ऐसा सामंजस्य बिठाने की कोशिश में जुटे हैं जिससे हर प्रकार के कार्यकर्ताओं को उपक्रित किया जा सके और पार्टी के अंदर किसी प्रकार के मतभेद और मनभेद का स्थान न रहे। अब बस इंतजार खरमास के खत्म होने का है। हांलांकि मकर संक्रांति के बाद से स्थितियां क्लियर होनी शुरु हो जाएंगी।
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