एमपी के ब्राह्मण विधायकों में आत्म विश्वास की कमी का फायदा उठाते हैं सत्ता और संगठन
हाल ही में उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण विधायकों की बैठक से दिल्ली की सियासत का टंप्रेचर बढ़ गया था। आखिर ऐसा हो भी क्यों नहीं ब्राह्मण एक ऐसा वर्ग है जिसे गाली देकर कोई नेता तो बन सकता है लेकिन उसको साथ लिए बगैर आगे नहीं बढ़ सकता है। वर्तमान में जो भाजपा देश का प्रतिनिधित्व कर रही है उस भाजपा का बीज ही ब्राह्मणों ने रोपा था जो एक वट वृक्ष बन चुका है। इतिहास इस बात का गवाह है कि ब्राह्मणों ने राज करने में कभी दिचचश्पी नहीं दिखाई। अगर ब्राह्मण राज करने की सोचते तो महान चन्द्रगुप्त मौर्य की कहानियां नहीं सुनाई जाती। भगवान परशुराम में की शक्ति के आगे कौन टिक सकता था लेकिन उन्होंने राज्य नहीं शिक्षा को महत्व दिया। बदलते समय के साथ आने वाली पीढ़ियों के दिमाग में गंदगी डाली गई कि ब्राह्मणों ने दलितों गरीबों का सोषण किया है। और ट्रेंड में आ गया कि ब्राह्मण को गाली दो और नेता बन जाओ। देश में अभिव्यक्ति के नाम पर सब छूट है। यही अपशब्द अगर ब्राह्मण दूसरे वर्ग को बोले तो उसके खिलाफ जातिसूचक शब्द का आरोप लगा कर जेल में डालने का प्राविधान भी है। पिछले कुछ समय से देश की राजनीति में ब्राह्मणों के खिलाफ एक ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जैसे वो देश के नागरिक ही नहीं हैं। अथवा देश में हैं तो उनकी संख्या इतनी कम है कि पक्ष और विपक्ष को उनकी जरुरत ही नहीं है। जबकि सत्ता पक्ष और विपक्ष भूल रहे हैं कि आजादी से आज तक ब्राह्मण वर्ग जिस पार्टी से जुड़ा है उसी की सरकार बनी है। जिसका सबसे बड़ा उदाहरण भाजपा है। आज 80 फीसदी से अधिक ब्राह्मण भाजपा के साथ है तो देश और प्रदेश में भाजपा की सरकार बन रही है। इसके बाद भी ब्राह्मणों को ही उपेक्षित करने के तरीके तलाशे जाते हैं। लेकिन अब ब्राह्मणों के धैर्य का भी बांध फूटने की कगार पर है जिसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के ब्राह्मण विधायकों से हुई। जिस प्रकार से विधायकों ने लखनऊ में बैठक की उससे सियासी दलों की धड़कनें तेज हो गई हैं। अब सवाल इस बात का उठ रहा है कि एमपी में 31 से अधिक ब्राह्मण विधायक होने के बाद भी एक भी ऐसा ब्राह्मण नेता नहीं जो अपने समाज के लिए खुल कर बोल सके। संतोष वर्मा मामले में सिर्फ ब्राह्मण समाज ने आवाज उठाई एक भी ब्राह्मण विधायक ने खुल कर बोलने की हिम्मत नहीं जुटाई। और ऐसा कर सभी ब्राह्मण विधायकों ने खुद की कमजोरी का परिचय दिया है लिहाजा उन्हें समाज के मंच में आना होगा और ब्राह्मणों के साथ होने वाले अन्याय के साथ खड़ा होना होगा। एमपी के ब्राह्यण विधायक अगर हिम्मत नहीं जुटा पाए तो आने वाले समय में जो ब्राह्मण राजनीति में भविष्य संवारना चाहते हैं उनके लिए सभी दरवाजे बंद हो जाएंगे।
What's Your Reaction?